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तेज रफ्तार बन रही जान की दुश्मन

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जिले में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति बेहद गंभीर हैं। हर रोज एक से दो व्यक्ति सड़क दुर्घटनाओं में काल का ग्रास बन रहे हैं। सीमा से फतेहाबाद से लेकर डबवाली तक दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ रहा है। कुछ वर्षों में यह मार्ग हादसों के लिए जाना जाने लगा है।
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औसतन हर दिन इस मार्ग करीब दो से चार हादसे दर्ज किए जाते हैं। हर दूसरे दिन यह हाईवे एक वाहन चालक की जान ले लेता है। वर्षभर में करीब 350 से 400 लोगों की जाने दुर्घटनाओं में जा रही हैं। यातायात पुलिस ने जिस स्थानों पर अधिक हादसे होते हैं, उसे दुर्घटना संभावित क्षेत्र घोषित करके वहां पर बाकायदा बोर्ड लगाया हुआ है। इनको ‘डेंजर पॉइंट’ के नाम से भी पुकारा जाता है।

ये हैं डेंजर पॉइंट
दिल्ली पुल, सिकंदरपुर मोड, मोरीवाला, डबवाली बाइपास, भंगू रोड, साहूवाला चौक, टी प्वाइंट रोहिड़ावाली, मौजूखेड़ा, चोरमार रोड, वायुसेना केंद्र रोड, कोटली, शेरपुरा रोड, खाटू श्याम पेट्रोल पंप, खैरेकां व साहूवाला प्रथम शामिल है।
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तेज गति और मवेशियों के कारण हादसे
यातायात थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि हाईवे पर हादसों को मुख्य कारण वाहनों की तेज गति व लावारिस मवेशियों को हाईवे पर घूमना है। हल्के हो या भारी वाहन, निर्धारित गति से ज्यादा वाहन चलाते हैं। ऐसे में चालक वाहन पर को नियंत्रित नहीं कर पाता और वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाता है। पूरे हरियाणा में हिसार से लेकर डबवाली हाईवे मार्ग पर लावारिस मवेशियों की संख्या बहुत अधिक है।

मवेशी एक दम से हाईवे के बीच आ जाते हैं और वाहन चालक या तो इन से टकरा कर या फिर इन्हें बचाने के चक्कर में हादसे का शिकार होकर अपनी जान से हाथ धो बैठता है। इस दिशा में काफी ध्यान देने की जरूरत है। 80 प्रतिशत हादसे इन दो मुख्य कारण के चलते होते हैं। 20 प्रतिशत हादसों का कारण चलती गाड़ी में मोबाइल सुनना या करना व नशे में वाहन चलाना पाया जाता है। सिरसा में एक बात खास देखने को मिलती है कि यहां के लोग यातायात नियमों के प्रति ज्यादा जागरूक नहीं है। 90 प्रतिशत होग इधर-उधर वाहन मोड़ने के लिए इंडीगेटर का प्रयोग नहीं करते।

एनएच वन लाइन का है
नेशनल हाईवे चार या छह लाइन का होना चाहिए लेकिन सिरसा से होकर गुजरने वाला एनएच 10 वन लाइन है। इससे रात के समय वाहन चलाने में जोखिम ज्यादा होता है। चालक की आंखों में सामने से आ रहे वाहन की तेज लाइट पड़ती है तो कुछ क्षण के लिए उसे सामने कुछ दिखाई नहीं देता और दुर्घटना हो जाती है।

ये है निर्धारित गति
हाईवे पर कार-जीप की निर्धारित गति 90 किलोमीटर प्रति घंटा है और भारी वाहनों की 60 किलोमीटर प्रति घंटा। एनएच पर वाहन चालक को बाकायदा अपनी निर्धारित गति बरकरार रखने के लिए साइन बोर्ड लगाए जाते हैं। आवश्यकता है कि चालक इसका पालन करें।

ये हैं खामियां
ट्रक चालक जगह-जगह हाईवे पर ही ट्रक पार्क कर देते हैं। ग्रामीण बस्ती से गुजरने वाले हाईवे पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। हाईवे से जुड़े ग्रामीण मार्गों पर स्पीड ब्रेकरों का निर्माण सहीं नहीं है।

यह होना चाहिए
हाईवे किनारे बने ढाबों और दुकानों का अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में हाईवे पर होने वाली गतिविधियों पर लगाम लगानी चाहिए।
हाईवे से सीधे जुड़े ग्रामीण मार्गों को समानांतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए।
मार्ग पर ट्रैफिक नियमों, ओवरलोडिंग पर सख्ती से लगाम लगनी चाहिए।
रात में खड़े ट्रकों कार्रवाई होनी चाहिए।

जरूरत के अनुसार पैचवर्क
हाईवे का पैचवर्क वैसे तो जरूरत के हिसाब से किया जाता रहता है लेकिन छह माह में एक बार इसका पैचवर्क अवश्य होता ही है। सिरसा-बरनाला हाईवे नेशनल हाईवे घोषित किया जा चुका है। पिछले माह ही सिरसा-ऐलनाबाद, सिरसा-रानियां व सिरसा- बरनाला हाईवे का पैचवर्क किया जाएगा।
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- जय सिंह, एसडीओ लोक एवं भवन निर्माण विभाग।

फोटो विवरण:09एसआईआरपी:30:फतेहाबाद-सिरसा हाईवे का चित्र।

 फोटो विवरण:09एसआईआरपी:31: ट्रैफिक इंस्पेक्टर दीपक कुमार।
फोटो विवरण:09एसआईआरपी:32:जय सिंह,एसडीओ लोक एवं भवन निर्माण विभाग सिरसा।
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