ओटू हेड से निकलने वाली मंगाला माइनर की चकबंदी को लेकर बुधवार को सिंचाई विभाग में किसानों के बयान दर्ज किए जाने थे। सात गांव के किसानों ने बुधवार को सिंचाई भवन में एकत्रित होकर चकबंदी के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मिले। अधिकारियों ने किसानों को कहा कि यह अदालत का मामला है, इसमें वह कुछ नहीं कर सकते। किसानों ने बताया कि सरकार उनकी जमीनों की चकबंदी करना चाहती है, किसान जिसके विरोध में है। चकबंदी के बाद किसानों को अपने खेतों में पानी लगाने के लिए बारी का इंतजार करना पड़ेगा।
जिले के सात गांव ढाणी काहन सिंह, माधोसिंघाना, जमाल, बरूवाली-दो, गुडिया खेड़ा, ढुकड़ा तथा कालुवाली ढाणी के करीब किसान मंगाला माइनर पर आने वाले किसानों की जमीनों की चकबंदी करने को लेकर आए फैसले के विरोध में किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने अधिकारियों को इस बारे में सूचना दी और कहा कि विभाग की ओर से अगर उनकी जमीनों की चकबंदी की गई तो किसानों को मजबूरन धरने पर बैठना पड़ेगा। गांव गुडिया खेड़ा के सरपंच तथा किसान नेता भरत सिंह बिरड़ा ने बताया कि कोर्ट ने बीते दिनों एक फैसला जारी किया था कि जिस प्रकार नहर का पानी एक ही खाल से समय सारिणी अनुसार लगता है उसी तरह मंगाला डिस्ट्रीब्यूटर पर आने वाली जमीनों की चकबंदी की जाए और उसी तरह समय सारिणी अनुसार पानी लगाया जाए। सरपंच भरत सिंह ने बताया कि सभी किसान इसको विरोध कर रहे हैं और अगर सरकार एक ही खाल से जमीनों तक पानी पहुंचाएगी तो कोई भी किसान सरकार को खाल के लिए जमीन नहीं देगा। आज के समय में किसान अपने पाइप लाइन से अपने खेतों में पानी लगा रहा है। इस प्रकार सभी किसानों के खेतों में पानी लग रहा है तथा किसी भी किसान को कोई समस्या नहीं हो रही है। बरूवाली- दो के सरपंच आत्माराम पूनियां ने बताया कि हम पहले जिस प्रकार पानी लगाते थे वैसे ही पानी लगाना चाहते हैं। हमें अपनी जमीनों की चकबंदी नहीं करवानी है। सरकार नहर की खुदाई करने की बजाय किसानों को परेशान करने का काम कर रही है। आज किसान नहर में पाइप डालकर अपने खेतों की सिंचाई कर लेता है और चकबंदी होने के बाद किसानों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ेगा। वहीं मंगाला माइनर में बाढ़ का पानी आता है और शुरू से लेकर अंत तक पानी पहुंच सकता है।
शुरू से ही उठा रहे हैं पानी
किसान हरीराम गोदारा ने बताया कि यह माइनर बीते 2005-06 में बनाया गया था। सभी किसान शुरू से ही नहर से लिफ्ट करके पानी उठा रहे हैं। मंगाला से लेकर जमाल तक करीब 11 हजार एकड़ का रकबा है जो इस नहर के जरिए अपनी जमीन की सिंचाई कर रहा है। किसान यह कभी नहीं होने देंगे कि उनकी जमीन की चकबंदी की जाए। इस कारण किसानों की फसलें सूख रही हैं। वहीं नहरी विभाग के कार्यकारी अभियंता बलराज चोहाण व सतीश जनेवा ने बताया कि उनके पास नरवाना का कार्यभार है। लेकिन सिरसा का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है तथा हाईकोर्ट के निर्देशानुसार बुधवार को कार्यालय में पहुंचकर दोनों पक्षों के किसानों के बयान दर्ज करवाए हैं। किसानों का बयान दर्ज करके आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ढाणी शेरावाली के किसानों ने माइनर में पानी छोड़ने की मांग की
वहीं सिंचाई विभाग में ढाणी शेरांवाली के किसान भी पानी की मांग को लेकर पहुंचे। किसानों ने एसई राजेश कुमार से मुलाकात की। ढाणी शेरावांली के सरपंच नत्थूराम, किसान नेता रमेश कुमार ने एसई से कहा कि शेरावाली माइनर पर खारी सुरेरां के पास पुल बनाया जा रहा है। लेकिन इसका काम पिछले कई दिनों से बंद है। ऐसे में करीब एक महीना 6 दिन हो गए कि निर्माणाधीन पुल से आगे पानी की क्रासिंग नहीं हो रही। जिससे कि शेरावाली, कर्मशाला, नीमला, मिठी सुरेरा, मिठनपुरा गांवों के किसानों की फसलें की सिंचाई नहीं हो रही। किसानों ने कहा कि जल्द से जल्द पुल का निर्माण कार्य पूरा करवाया जाए और निर्माणधीन पुल के नीचे से पाइपें लगाए, ताकि पानी का बहाव शुरू हो। एसई राजेश कुमार ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही वहां पर पाइपें दबवाकर पानी का बहाव शुरू करवाएंगे। इसके बाद किसान वापस लौटे। इस अवसर पर किसान सुरजीत, कृष्ण, विनोद, ओमप्रकाश, दौलतराम उपस्थित थे।