ओढां (सिरसा)। नरमे की फसल पर गुलाबी सुंडी ने दस्तक दे दी है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। अधिकतर किसान इन पर कीटनाशकों का छिड़काव करने के साथ ही कई जगहों पर अपनी फसल पर ट्रैक्टर (हैरो) चलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
ओढां खंड के गांव जंडवाला जटान के कुछ खेतों पर उगी अगेती फसल के टिंडों पर गुलाबी सुंडी का प्रकोप दिखा। किसान रेशम सिंह, गुरनाम सिंह, जोगिंद्र सिंह, चानन सिंह, छविंद्र सिंह, कुलवंत सिंह, प्रेम सिंह और बीकर सिंह ने बताया कि उनके खेत में गुलाबी सुंडी का प्रकोप शुरू हो गया है। एक पौधे पर 4 से 5 टिंडों में सुंडी पाई जा रही है। उन्होंने कहा कि रोकथाम के लिए एक-दो बार कीटनाशकों का छिड़काव कर दिया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में मजबूरन उन्हें नरमे की फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा है। किसानों का कहना है कि कीटनाशकों पर खर्च करने के बजाय अभी बोने पर मूंग की फसल तो हो जाएगी।
किसान रेशम सिंह ने बताया कि 10 एकड़ में नरमा बोया था। इसमें से चार एकड़ नरमा सुंडी की चपेट में आ गया। उन्हें मजबूरन फसल पर ट्रैक्टर चलाना पड़ा। किसान बीकर सिंह ने पांच एकड़, प्रेम कुमार, बलजिंद्र सिंह, गुरमेल सिंह ने दो-दो एकड़ और छविंद्र सिंह ने एक एकड़ नरमे की फसल पर ट्रैक्टर चलाया है। किसानों ने कहा कि सुंडी का प्रकोप अभी से ही शुरू हो गया है, जबकि फसल को पूरी तरह से टिंडे भी नहीं लगे। अगर यही स्थिति रही तो खेती घाटे का सौदा बनकर रह जाएगी। संवाद
गुलाबी सुंडी के बारे में सूचना मिल रही है। किसान सबसे पहले तो अपने खेत में ये सुनिश्चित करें कि नरमे की फसल के पास बनछटियों का ढेर न हो। गुलाबी सुंडी अधखिले टिंडों में नरमे के बिनौलों एवं भंडारित बनछटियों में रहती है। बनछटियों से टिंडे एवं पत्ते झाड़कर नष्ट करें। सुंडी के नियंत्रण के लिए किसान प्रोफेनोफोस/क्यूराक्रॉन/सैलक्रॉन/केरिना 50 ईसी की तीन मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर छिड़काव करें। अपनी फसल का निरीक्षण रोज करते रहें। रामपाल रंगा, तकनीकी सहायक, कृषि विभाग डबवाली।