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काश आज मेरे दादा जी जिंदा होते तो बड़े खुश होते: सविता पूनियां

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भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी सविता पूनिया का ओलंपिक के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ है। सविता पूनिया के चयन के बाद उनके गांव जोधकां और परिवार में जश्न का माहौल है। सविता पूनिया का ओलंपिक में खेलने के लिए दूसरी बार चयन हुआ है। इससे पहले सविता पूनिया 2016 का ओलंपिक खेल चुकी है। अपने चयन पर सविता पूनिया ने कहा कि काश आज मेरे दादा जी जिंदा होते तो बड़े खुश होते। आज मैं जो कुछ भी हूं अपने दादा रणजीत सिंह पूनिया की बदौलत हूं। सविता ने बताया कि वीरवार को जब उसे भारतीय टीम में चयन होने की सूचना मिली तो उसी समय उसे सबसे पहले अपने दादा जी की याद आई। तब उसने सबसे पहले अपने पिता महेंद्र पूनिया को फोन करके जानकारी दी। मेरे दादा जी का देहांत 2013 में हो गया था, तब मैं पटियाला में कैंप में भाग ले रही थी। 2016 के ओलंपिक खेलने के लिए जब मेरा भारतीय टीम में चयन हुआ तो उस समय मुझे लगा कि आज मैंने अपने दादा जी का नाम रोशन किया है। जब मेरा भारतीय टीम में चयन हुआ तो मैं अपने घर गई तब दादा जी ने मुझे 101 रुपये का शगुन देकर आशीर्वाद दिया और कहा कि आज मेरी पोती ने मेरा नाम रोशन कर दिया। मेरा चयन भारतीय टीम में हुआ था तो उस समय अखबारों में खबरें लगी। परंतु मेरे दादा जी को पढ़ना लिखना नहीं आता था, तब दादा जी ने पढ़ाई शुरू की और 6 महीने बाद उन खबरों को पढ़कर मुझे सुनाया।
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चचेरी बहन की शादी में नहीं हो सकी शामिल
सविता पूनिया ने बताया कि उसकी चचेरी बहन मंजू की शादी 2017 में थी। तब वह बैंगलोर कैंप में थी और दो दिन बाद इटली के लिए रवाना होना था। इस लिए वह मंजू की शादी में शामिल नहीं हो पाई, तब मैं निराश हो गई। मैंने मंजू को फोन किया तो उसने कहा कि मैं तेरी मजबूरी समझ सकती हूं, तू मन लगाकर हॉकी खेल। परिवार में ऐसे कई अवसर आए है जब मैं उनमें शामिल नहीं हो सकी। एक खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा त्याग यहीं होता है।
सविता पूरे सिरसा की बेटी हैं: महेंद्र पूनिया
सविता के पिता महेंद्र पूनिया ने कहा कि सविता केवल उनकी बेटी नहीं है, बल्कि पूरे सिरसा की बेटी है। उम्मीद है भारतीय टीम अबकी बार ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करेगी।
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