डेढ़ दशक पुरानी बरसाती नहर की मांग पूरी न होने से हताश गांव सुलतानुरिया के लोगों ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया। ग्रामीण चुनाव प्रचार के लिए भी किसी भी राजनीतिक दल के नेता को गांव में नहीं घुसने देंगे। मतदान के दिन पोलिंग पार्टियों को भी गांव में आने से रोका जाएगा।
इसके अलावा ग्रामीण अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने पर भी विचार कर रहे हैं। मंगलवार को ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन भी किया और साडा हक एत्थे रख के नारे भी लगाए। ग्रामीण इस मामले में संघर्ष समिति का गठन करेंगे। उसके बाद धरने और प्रदर्शन की रणनीति समिति बनाएगी। इस अहम फैसले से पहले ग्रामीणों ने सोमवार रात को चौपाल में बैठक भी की थी।
नेता हर बार देते हैं आश्वासन
सुलतानपुरिया क्षेत्र में भूजल खारा है। अधिकतर रकबे में नहरी पानी से सिंचाई नहीं हो पाती। भूजल खारा होने और नहरी पानी न मिलने के कारण फसलें बुरी तरह प्रभावित होती है। ग्रामीण डेढ़ दशक से घग्गर से बरसाती नहर निकालने की मांग करते आ रहे हैं। अधिकारी और राजनीतिक दल हर बार ग्रामीणों को आश्वासन दे देते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करते।
यहां से निकलनी है नहर
ग्रामीणों के अनुसार बरसाती नहर के लिए सर्वे भी हो चुका है। योजना के अनुसार झोरड़नाली से घग्घर नदी से बरसाती नहर निकाली जाएगी जो ढाणी बंग्गी, सुलतानपुरिया, नानूआना और अभोली के रकबे से होकर गुजरेगी। इस नहर के बनने से एक दर्जन गांवों की लगभग 10 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी। नहर बनने का काम सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया।
ये लोग थे मौजूद
बैठक में सरपंच प्रतिनिधि कालुराम खिचड़, पंच केवल कृष्ण, बंशी लाल, पंच पति कृष्ण लाल, जुगलाल, चिमन लाल, गुरदेव सिंह, भजन लाल, हरिकृष्ण, मलकीत सिंह, देवीलाल, हरफूल, बलविंद्र, शांतिप्रकाश, सुखविंद्र, अमरजीत, देशराज, रामकिशन, रूप राम, मदनलाल, पर्वत सिंह आदि मौजूद थे।