सिरसा। प्रभु रामलाल नर सेवा नारायण सेवा योग ट्रस्ट हुडा में सोमवार को मासांत सत्संग हुआ। इसमें योग गुरु रघुबीर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन की चार सच्चाइयां हैं। एक दुख, दूसरा दुख का कारण अज्ञान, तीसरा निवृत्ति ज्ञान और चौथा परमानंद।
उन्होंने कहा कि इस नश्वर सकार में दुख के बारे में परम संत गुरुनानक देव ने सत्य फरमाया है कि बाली रोवे नाहे भनार, नानक दुखिया सब संसार। इस विषय में फरीद साहब ने सत्य कहा है मैं जानिया दुख, मुझ को दुख सवाया जग, ऊपर चढ़ के वेखिया, घर-घर ऐहो मृग। चाहे आप कहीं भी रहें लेकिन दुख सर्वव्यापक है। इसका कारण है अज्ञान।
मनुष्य के जीवन में अज्ञान रहने तक दुख बना रहेगा। यह अज्ञान अंधकार ईश्वर को ढक लेता है। इस दुख का निवारण केवल ज्ञान और ब्रह्म ज्ञान होने पर ही हो सकता है, उसके बिना नहीं। ब्रह्मज्ञान पूर्ण गुरु की कृपा से होता है। पूर्ण गुरु की कृपा बिना ब्रह्मज्ञान नहीं हो सकता।
रघुबीर महाराज ने कहा कि इस सत्य को सिख, धर्म, योग मन, सनातन धर्म मानते हैं। दास ने भी ऐसा जगत गुरुस्वामी देवी दयाल महाराज की कृपा से अनुभव किया। आत्मज्ञान होने पर ही परमानंद, परम शांति की प्राप्ति है। इसको प्राप्त करने के लिए राजा लोग अपना राजपाठ भी त्याग देते हैं, लेकिन सिख धर्म, योग मत, प्रभु रामलाल का योग घर त्यागने के हक में नहीं है। गुरु कृपा से मनुष्य घर में रह कर ही आत्म ज्ञान और परमानंद को प्राप्त कर सकता है।
इस पवित्र मौके पर शक्तिसागर, पृथ्वी सिंह बैनीवाल, यश चावला योगाचार्य, हरि सिंह, लक्ष्य, भारत भूषण, विपिन, विजय, सतीश, रोहताश, अंकिता, हर सिमरन, संगीता, ऊषा, फूलरानी, सुमन, अंजू, रजनी आदि भक्तजन मौजूद थे।