केंद्रीय कमेटी के आह्वान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों ने सुरक्षा कानून व बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई को लेकर विरोध दिवस मनाते हुए शुक्रवार को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रख रोष जताया। वहीं आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।
आईएमए की जिला प्रधान डॉ. अर्चना अग्रवाल व उपप्रधान डा. आशीष खुराना ने संयुक्त रूप से बताया कि उपचार के दौरान डॉक्टरों पर हिंसात्मक घटनाएं आम बात हो गई है। ड्यूटी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं निंदनीय हैं। ऐसे लोगों पर ठोस धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कर इनकी फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई करते हुए सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि फिर से इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने सरकार से मांग की कि चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए ठोस केंद्रीय कानून बनाया जाए, ताकि हिंसात्मक घटनाएं करने से पहले लोग कई बार सोचें। लोगों को अगर किसी बात से दिक्कत है तो उसके लिए कानून है, हिंसा की बजाय अहिंसा का रास्ता अपनाकर समस्या का हल निकाले। डॉ. अर्चना ने कहा कि एलोपैथी पद्धति के खिलाफ लगातार जहर उगल रहे बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आईएमए द्वारा सरकार को लगातार अवगत करवाया जा रहा है, लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। बाबा रामदेव खुद की कोरोनिल दवाई बेचने के लिए ओछे हथकंडे अपना रहे हैं। यहीं नहीं आईएमए के दबाव के बाद बाबा रामदेव ने सॉरी भी कटाक्ष के रूप में फील किया, जोकि शर्मनाक हैं। चिकित्सकों ने बाबा रामदेव के खिलाफ तुरंत प्रभाव से केस दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग की।