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Sirsa News: उजाले के लिए सड़कों पर लगीं स्ट्रीट लाइटें, रहता है अंधेरा

Thu, 28 May 2026 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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बरनाला रोड पर सदर थाने के पास आधी बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट। संवाद 
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- बरनाला रोड, डबवाली रोड और मिनी बाईपास पर जगह-जगह लाइटें बंद होने से लोगों को होना पड़ रहा परेशान
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- ठेकेदार को मरम्मत का टेंडर देने के बाद भी नहीं हो रहीं दुरुस्त, नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली के चलते ठेकेदार पर नहीं लगता है जुर्माना



फोटो

संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। बरनाला रोड और मिनी बाईपास रोड की अधिकतर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। ऐसे ही हालात हिसार रोड, बेगू रोड पर भी हैं।
रात के समय में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी सड़कों पर स्ट्रीट लाइटों की जांच नहीं करता है। यदि कोई जांच करता तो उन्हें पता होता कि शहर में कितनी लाइटें बंद पड़ी हैं।
बिजली शाखा के इंचार्ज जेई भी रात के समय में इन स्ट्रीट लाइटों की जांच नहीं करते हैं। ठेकेदार व लाइन इंस्पेक्टर के भरोसे पूरे शहर को छोड़ दिया गया है। इसी का परिणाम है कि शहर की मुख्य सड़कों पर रात के समय में अंधेरा देखने को मिलता है। बरनाला रोड पर सदर थाने से लेकर जेल तक कई लाइटें बंद हैं। कई खराब पड़ी हैं। अनुमानित 30 के आसपास लाइटें खराब हैं। मिनी बाईपास पर दो माह से नगर परिषद प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा है। बीएंडआर के पोल लगाने के नाम पर इस रोड को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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शहर में 32 वार्ड है। 10 के आसपास मुख्य रोड हैं। इनकी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी नगर परिषद ने एजेंसी को सौंपी है। एजेंसी की ओर से महज कार्यालय में आने वाली शिकायतों का निवारण किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन 15 से 20 के आसपास शिकायतें शहर से स्ट्रीट लाइट की आती हैं। इन शिकायतों को ही ठेकेदार के कर्मचारी निपटाते हैं। शहर की 16 हजार स्ट्रीट लाइटों में से महज प्रतिदिन 15 से 20 शिकायतों को निपटान होता है।
किसी भी एजेंसी को काम करने के लिए अपने साधनों की जरूरत होती है। नगर परिषद की ओर से एजेंसी को स्वयं की गाड़ी दी गई है। यह गाड़ी बिजली निगम को दी गई थी कि ताकि इमरजेंसी के दौरान इसका प्रयोग कर लाइटों को दुरुस्त किया जा सके। आठ माह तक ठेकेदार ने इस गाड़ी का बिना किसी अनुमति के प्रयोग किया और नगर परिषद को कोई पैसा जमा नहीं करवाया। उसके बाद लाइट इंस्पेक्टर के माध्यम से गाड़ी की प्रशासन से मांग कर डाली।
प्रशासन की ओर से उसे गाड़ी दे दी गई है लेकिन इसको लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। जब एजेंसी को टेंडर दिया गया था तब उसमें शर्त थी कि एजेंसी वाहनों व कर्मचारियों की व्यवस्था अपने स्तर पर करेगी। यदि कंपनी के पास स्वयं के वाहन ही नहीं थे तो बिना जांच किए उसे टेंडर किस आधार पर दे दिया गया। इसको लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान लगता है।
शहर में दो ही फर्मों को मिलता है टेंडर, बदल-बदल कर लेते हैं
शहर में स्ट्रीट लाइट को लेकर पिछले कुछ सालों से मरम्मत का टेंडर दो ही फर्मों को दिया जाता है। दोनों ही फर्मों के पास मशीनरी नहीं हैं। वे महज कर्मचारी की व्यवस्था करते हैं और बाकी मशीनरी नगर परिषद की प्रयोग में लाई जाती हैं। निचले व ऊपरी स्तर के अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल होने के कारण कोई सवाल-जवाब नहीं किए जाते हैं।
डीएमसी ने पूर्व में की थी जांच, लगाया था जुर्माना
नगर परिषद की स्ट्रीट लाइटों की रात के समय जांच तत्कालीन जिला नगर आयुक्त सुरेंद्र बेनीवाल ने की थी। जांच के दौरान सामने आया था कि शहर की मुख्य सड़कों पर कई जगहों पर स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। इसके बाद एजेंसी को नोटिस देकर जुर्माना लगाया गया था। वहीं, अधिकारियों को फटकार लगाई गई थी। इसका परिणाम हुआ था कि अधिकारी रात के समय मुख्य सड़कों की गश्त करते थे।
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कोट्स
स्ट्रीट लाइटों की मॉनिटरिंग की जाती है। रात के समय विशेष गश्त कर लाइटों की जांच की जाएगी। जहां पर लाइटें बंद पाई जाएंगी, एजेंसी को नोटिस जारी किया जाएगा। विभागीय कार्रवाई एजेंसी को लेकर अमल में लाई जाएगी।
-अजय कुमार, जेई, नगर परिषद
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