प्रदेश सरकार द्वारा गरीब पात्रों के लिए छत मुहैया करवाने के उद्देश्य को लेकर चलाई गई प्रिय दर्शनी आवास योजना पिछले करीब ढाई वर्षों से बजट के फेर में उलझ कर रह गई है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर व बाबुओं के आश्वासनों के बाद अब लाभार्थियों ने इस विषय में उम्मीद छोड़ दी है कि उनके खातों में अंतिम किस्त के रूप में राशि आएगी।
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2013-14 में प्रियदर्शनी आवास योजना के तहत ओढां खंड में करीब साढ़े छह सौ मकान स्वीकृत हुए थे जिसके तहत विभागीय नियमानुसार प्रथम किस्त के रूप में 25 हजार रुपये की राशि लाभार्थियों के खातों में डाल दी गई। निर्माण में दूसरे निर्देश के मुताबिक डोर लेंटर तक मकान पूरा होने उपरांत 35 हजार रुपये की राशि लाभार्थियों के खाते में डाली जानी थी। जिसमें से अधिकांश पात्रों के खातों में दूसरी किस्त डाल दी गई, लेकिन मकान निर्माण कर सभी नियम पूरा कर दस्तावेज कार्यालयों में जमा करवाने के बावजूद पात्रों को अभी तक अंतिम 21 हजार रुपये की राशि अभी तक नहीं दी गई है। जिसके चलते लाभार्थी पात्र सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट काटकर थक चुके हैं। लेकिन अधिकारी उन्हें हर बार आश्वासनों की किस्तें थमा रहे हैं।
इन लाभार्थियों में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें अभी तक दूसरी किस्त भी नहीं मिली है। पात्रों ने बताया कि उन्होंने इस उम्मीद से इधर उधर से इंतजाम कर मकान पूर्ण किया था कि किस्त आते ही उधारी चुका देंगे, लेकिन वे करीब ढ़ाई सालों से अधिकारियों से किस्तों की जगह महज आश्वासन ही मिल रहे हैं। राशि के अभाव में उनके कई मकान अधर में लटके हुए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वे चंडीगढ़ मुख्यालय को इस बारे समय समय पर अवगत करवाते हैं लेकिन बजट की समस्या दरपेश आ रही है।
अगले सप्ताह तक का मिलता है आश्वासन
इस बारे जब डीआरडीए विभाग से पूछा जाता है तो उसके अधिकारियों का पिछले लंबे समय से यही जवाब सुनने को मिल रहा है कि अगले सप्ताह बजट आने की उम्मीद है। लाभार्थियों ने बताया कि ये आश्वासन पिछले लंबे समय से दिया जा रहा है। लाभार्थियों ने अब इस विषय में सीएम विंडो पर जाने का मन बनाते हुए कहा है कि अधिकारी उन्हें बजट की बात कहकर टरका रहे हैं।
हमने लाभार्थियों के सभी दस्तावेज मुख्यालय को भेज रखे हैं। बजट के अभाव में ये समस्या आई है। मैं इस समय कार्यालय से बाहर हूं। मैं कार्यालय में आकर ही बता पाऊंगा कि राशि कब आएगी।
संजय कुमार, टेकिभनकल असिस्टेंट डीआरडीए विभाग