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समय सीमा समाप्त होने के करीब, थेहड़ में सर्वे शुरू करने पहुंचा प्रशासनिक अमला

Wed, 06 Apr 2016 01:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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मामला - फोटो : Bureau
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प्राचीन धरोहर थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण को हटाने की दिशा में प्रशासन काम शुरू कर दिया है। प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट से बीस अप्रैल तक का समय मांगा था। थेहड़ पर अनाधिकृत निर्माण पांच हजार परिवारों के घरों का है जिसमें करीब 25 हजार लोग रहते हैं। मंगलवार की सुबह तहसीलदार चांदीराम के नेतृत्व में प्रशासनिक अलमा थेहड़ पर पहुंचा।
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तहसीलदार, पटवारी व कानूनगो को देखते ही थेहड़ वासी समझ गए कि उन्हें बेघर करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। थेहड़ वासियों की भीड़ प्रशासनिक अमले के आसपास जमा हो गई। थेहड़ प्रधान एवं हाईकोर्ट में थेहड़ वासियों की तरफ से याचिकाकर्ता जय किशोर लोगों के बीच पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाया कि किसी को नुकसान नहीं पहुंचाना और ऐसा कोई काम नहीं करना, जिससे शांति भंग हो।

इसके बाद अधिकारियों की जान में जान आई। तहसीलदार चांदीराम ने थेहड़ वासियों से कहा कि वे किसी को उजाड़ने के इरादे से यहां नहीं आए हैं, बल्कि थेहड़ में बने मकानों का सर्वे करने यहां पहुंचे हैं। सर्वे टीम में पटवारी जसवीर सिंह, कानूनगो मदन मोहन, गुरदीप सिंह व पवन कुमार शामिल है। टीम ने थेहड़ में घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की संख्या, उनके आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड से संबंधित आंकड़े और जितने ऐरिया में मकान बना हुआ है, उसकी पैमाइश ली। थेहड़ में बने मकानों व लोगों का सर्वे कर आंकड़े प्राप्त करने के बाद जिला प्रशासन उक्त रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों को भेजेगा। इसके बाद आगामी कार्रवाई के आदेश प्रशासन को मिलेंगे।
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जितनी जगह में मकान है उतनी जमींन दे सरकार
थेहड़ वासियों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी बोल रहे हैं कि उन्हें सरकार रहने के लिए जमीन देगी, लेकिन जमीन कितनी और कहां देगी इसका जवाब नहीं मिल रहा। लोगों का कहना है कि थेहड़ में जो मकान जितनी जगह में बना है उतनी जगह सरकार शहर में रहने के लिए दे तो वे थेहड़ खाली कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी सूरत में थेहड़ से छोड़कर नहीं जाएंगे। अपने घरों की रक्षा के लिए जान दे देंगे लेकिन थेहड़ खाली नहीं करेंगे। लोगों ने लाखों रुपया खर्च करके अपने घरों का निर्माण किया है। सारी सरकारी सुविधाएं थेहड़ पर उपलब्ध हैं। नगर परिषद को हाऊस टैक्स भरा जाता है और चुनावों में हर पार्टी से जुड़ा बड़े-बड़े नेता उनके पास आकर वोट मांगते हैं। थेहड़ संघर्ष समिति की प्रधान एडवोकेट संजू बाला का कहना है कि सरकार अगर ये सोचती है कि बलपूर्वक थेहड़ खाली करवा लेगी तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है।

यह है पूरा मामला
20 जनवरी 2016 को सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में यह जवाब दाखिल किया गया था, जिससे हरियाणा के अतिरिक्त महा अधिकक्ता ने हितेश पंडित हाईकोर्ट से कहा सिरसा के थेहड़ में जो भी लोग अनधिकृत रूप से रह रहे हैं। उन्हें चार महीने की अवधि के भीतर हटा दिया जाएगा। थेहड़ की जमींन पर अपना दावा करते हुए पुरातत्व विभाग ने अदालत में याचिका दायर करके इसे कब्जा मुक्त करवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने जिला प्रशासन से थेहड़ से अनधिकृत निर्माण हटाने का आदेश दिया। जिला प्रशासन की तरफ से थेहड़ के लोगों को नोटिस जारी करके 26 अक्टूर 2012 तक अपने मकान खाली करने का हुकम सुनाया।

जिलाधीश की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि 20 अक्तूबर तक कब्जा न हटाने पर बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और 26 अक्तूबर को मकानों को गिराकर कब्जा ले लिया जाएगा। जिससे लोगों में हड़कंप मच गया था। थेहड़ वासी सड़कों पर उतर आए और सिरसा में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। थेहड़ वासियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट आठ नवंबर तक स्टे लगा दिया और साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सरकार की तरफ से मिले जवाब के बाद स्टे हटा लिया गया। अब हाईकोर्ट को दिए गया समय करीब आ गया है और थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटाने के लिए 15 दिन शेष बचे हैं।
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