क्या है फर्जीवाड़ा
- गांव निठराना के स्वामी रामचंद्र स्मृति विद्यालय से छठीं कक्षा पास की और दयानंद में दाखिला लिया
- जन्म तिथि 10-12-1983, सातवीं कक्षा में प्रवेश 1-12-1995 और छोड़ने की तिथि 22-04-1996
- 3 दिसंबर 2010 को दयानंद स्कूल से जारी प्रमाणपत्र में आठवीं कक्षा में 1996-97 पास होना दर्शाया
जांच के दौरान
- शिक्षा अधिकारी के सूचना मांगने पर दयानंद स्कूल टोपरियां के प्रिंसिपल ने सूचना देने से किया इनकार
- प्रवेश रजिस्टर में खामियां, टीसी में 22-04-96 को स्कूल छोड़ा 13-05-1997 में आठवीं उत्तीर्ण
- गांव निठराना के स्वामी रामचंद्र स्मृति विद्यालय से नहीं की छठी पास, नहीं मिली इस नाम की कोई छात्रा
- लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय बुधवालिया में 07-07-1993 में छठी कक्षा में प्रवेश लिया और 13-05-1995 को सातवीं कक्षा में फेल होने पर विद्यालय छोड़ दिया। जन्म तिथि 05-05-1981 बताई गई है।
आठवीं पास का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सरपंच बनने का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सीएम विंडो में शिकायत करने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उधर सरपंच धर्मा देवी ने फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय का असली प्रमाण पत्र उसके पास है। जांच अधिकारी को भी राजस्थान से तसल्ली करवा दी जाएगी। चुनाव हारने वाले लोग उन पर बे बुनियाद व निराधार आरोप लगाकर अपनी झुंझलाहट उतार रहे हैं।
क्षेत्र के गांव बाहिया के सरपंच का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था। चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी का आठवीं पास होना अनिवार्य था। गांव की मौजूदा महिला सरपंच धर्मा देवी ने नामांकन पत्र भरते समय आठवीं पास होने का दावा किया और राजस्थान के जिला हनुमानगढ़ के गांव टोपरियां के निजी स्कूल दयानंद उच्च माध्यमिक विद्यालय द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। तीन दिसंबर 2010 को जारी दिखाए गए इस प्रमाण पत्र में दर्शाया गया है कि छात्रा धर्मा देवी पुत्री बनवारी लाल ने सत्र 1996-97 के दौरान आठवीं कक्षा 1200 में से 724 अंक लेकर उत्तीर्ण की। उनका रोल नंबर 2613 और प्रवेशांक 410 तथा जन्म तिथि 10-12-1983 बताई गई है।
स्थानातंरण पत्र में प्रवेश दिनांक 1-12-1995 और विद्यालय छोड़ने की तिथि 22 अप्रैल 1996 दिखाई है। यह भी बताया गया है कि छात्रा धर्मा देवी ने गांव निठराना के स्वामी रामचंद्र स्मृति विद्यालय से छठीं कक्षा पास करने के बाद उनके विद्यालय में दाखिला लिया था। गांव बाहिया निवासी भूप सिंह और राजस्थान के गांव कुलचंद्र निवासी रघुबीर ने इस मामले में सच्चाई जानने के लिए हनुमानगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) को सूचना के अधिकार के तहत आवेदन भेज जानकारी मांगी। मिली जानकारी से यह फर्जीवाड़ा उजागर हो गया और सरपंच व निजी स्कूल के प्रधानाचार्य को कटघरे में खड़ा कर दिया।
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) हनुमानगढ़ कोड नंबर 3282 ने बताया कि 18 फरवरी 2016 को राजकीय माध्यमिक विद्यालय नाईवाला (टिब्बी) के प्रधानाध्यापक दयानंद उच्च माध्यमिक विद्यालय टोपरियां गए। विद्यालय स्टाफ ने प्रधानाचार्य के अवकाश पर होने हवाला देकर रिकॉर्ड दिखाने में असमर्थता जताई। 23 फरवरी 2016 को फिर टोपरियां जाने पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने टीसी प्रवेश फॉर्म व सत्र 1995-96 और 1996-97 का छात्रा उपस्थिति रजिस्टर दिखाने से मना कर दिया।
छात्र प्रवेश रजिस्टर का अवलोकन करने पर पाया गया कि छात्रा धर्मा देवी के पिता का नाम नहीं है। रजिस्टर में छात्रा की प्रवेश तिथि और विद्यालय छोड़ने की तिथि अपठनीय है। स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने की दिनांक अंकित नहीं है और न ही प्रधानाचार्य के हस्ताक्षर है। जारी टीसी में पाठशाला छोड़ने का दिनांक 22 अप्रैल 1996 है जबकि उक्त छात्रा को 13 मई 1997 को उर्त्तीण दिखाया गया है।
दूसरी और मसीतांवाली उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ने भी चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत की है। 19 मार्च 2016 को स्वामी रामचंद्र दास स्मृति माध्यमिक विद्यालय निठराना के प्रवेश और परीक्षा परिणाम रजिस्टर का सत्र 1990 से लेकर 1996 तक अवलोकन किया गया जिसमें धर्मा देवी पुत्री बनवारी लाल नाम की कोई छात्रा अध्ययनरत नहीं रही है। उक्त विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने पत्र क्रमांक 2016/70 द्वारा स्पष्ट किया है कि धर्मा देवी ने 1994-95 में न तो इस विद्यालय में प्रवेश लिया और न ही कोई कक्षा उत्तीर्ण की है और न ही कोई स्थानांतरण पत्र जारी किया गया है।
उधर राजकीय माध्यमिक विद्यालय टोपरियां के प्रधानाध्यापक ने जानकारी उपलब्ध करवाई है कि धर्मा देवी पुत्री बनवारी लाल ने लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय बुधवालिया में सात जुलाई 1993 को छठी कक्षा में प्रवेश लिया और 13 मई 1995 को सातवीं कक्षा में फेल होने पर विद्यालय छोड़ दिया। छात्रा की जन्म तिथि पांच मई 1981 बताई गई है।
राजस्थान के जिला शिक्षा अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में गांव बाहिया की सरपंच और टोपरियां के निजी विद्यालय के प्रधानाचार्य को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारी से स्पष्ट होता है कि आठवीं कक्षा का फर्जी प्रमाण पत्र बनाया गया जबकि धर्मा देवी ने छठीं कक्षा ही उत्तीर्ण की है। जन्म तिथि भी गलत दर्शाई गई है। ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल सहित उच्चाधिकारियों को शिकायत पत्र भेजकर गांव बाहिया की मौजूदा महिला सरपंच धर्मा देवी को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। ग्रामीणों ने राजस्थान की मुख्यमंत्री सहित उच्चाधिकारियों को शिकायत पत्र भेजकर टोपरिया के दयानन्द उच्च माध्यमिक विद्यालय की मान्यता रद्द करने की मांग की है।
सीएम विंडो में शिकायत करने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच पुलिस को सौंप दी है। करीवाला पुलिस चौकी के प्रभारी ताराचंद ने बताया कि तफतीश के लिए दो बार गांव टोपरिया जा चुके है मगर प्रधानाचार्य नहीं मिले। अन्य स्टाफ ने रिकॉर्ड दिखाने में असमर्थता जताई है। 29 अप्रैल को फिर गांव टोपरियां में जाकर रिकॉर्ड की जांच करने का प्रयास किया जाएगा।
गांव बाहिया की महिला सरपंच धर्मा देवी ने फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालय का असली प्रमाण पत्र उसके पास है। जांच अधिकारी को भी राजस्थान से तसल्ली करवा दी जाएगी। चुनाव हारने वाले लोग उन पर बे बुनियाद व निराधार आरोप लगाकर अपनी झुंझलाहट उतार रहे हैं।