गांव सुकेराखेड़ा की ढाणी में पिछले दस सालों से चल रही प्राथमिक पाठशाला को आज तक न तो बिजली मिली है और न ही पानी। पाठशाला में लेबर क्लास के बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। बुधवार को उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ गिरदावरी रिपोर्ट का मूल्यांकन करते हुए पाठशाला में पहुंची तो परिस्थितियां सुन वह चौंक गईं। पाठशाला में नियुक्त दो टीचरों ने बताया कि बिजली न होने पर पेड़ों के नीचे कक्षाएं लगती हैं। पानी के लिए मोटर है लेकिन बिजली के बिना वह भी नहीं चलती। उपायुक्त ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एसडीएम डबवाली से रिपोर्ट तलब की है।
पाठशाला में नियुक्त टीचर राजेश सिंह तथा राजेश कुमार ने जिला उपायुक्त को बताया कि वर्ष 2006 में ढाणी में प्राथमिक पाठशाला शुरू हुआ था। शैक्षणिक सत्र में 28 बच्चों ने पांचवीं की परीक्षा दी। टीचरों ने बताया कि एग्रीकल्चर फीडर से उन्हें कनेक्शन दिया हुआ है। जिससे बिजली रात को दो घंटे के लिए आती है। घरेलू फीडर से कनेक्शन नहीं। इसके लिए वे अपने स्तर पर कई बार बिजली अधिकारियों के पास जा चुके हैं। यहां तक की सर्वे रिपोर्ट भी दे चुके हैं। हर बार उन्हें यही आश्वासन मिलता है कि काम हो जाएगा। आश्वासन सुनते-सुनते दस साल बीत गए हैं। पाठशाला में जन स्वास्थ्य विभाग का कनेक्शन नहीं है।
इसके लिए भी वे कई बार दर्खास्त दे चुके हैं, लेकिन आज तक सुनवाई नहीं हुई। उपायुक्त ने शिकायत सुनने के बाद एसडीएम डबवाली संगीता तेतरवाल से रिपोर्ट तलब करते हुए समस्या का समाधान करवाने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने पाठशाला की चारदीवारी न होने पर सरपंच गुरलाल से सवाल किया। उपायुक्त ने पंचायत को चारदीवारी बनाने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने पाठशाला में बनी टॉयलेट पर लड़के तथा लड़कियों के लिए लिखवाने के निर्देश संबंधित टीचरों को दिए।
पाठशाला से चार एकड़ दूर नहर है। नहर में पाइप डाली हुई है, जितनी देर नहर चलती है, पानी पाठशाला में पहुंचता है। पंद्रह दिन हमें पानी मिल जाता है। नहर में पानी की कमी होने पर आस-पास की ढाणियों से मटकों में पानी भरकर लाया जाता है। ताकि बच्चों की प्यास बुझ सकें।
-राजेश कुमार, टीचर, प्राथमिक पाठशाला, ढाणी सुकेराखेड़ा