शहर का बेगू रोड अपनी बदहाली पर सालों से आंसू बहा रहा है। रही सही कसर टेंडर लेने वाले ठेकेदार सड़कों को उखाड़कर पूरी कर देते हैं। अब आलम यह है कि गेहूं लेकर मंडी में आने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण घंटों तक सड़क जाम हो जाता है। इस जाम के झाम से शहर और शहरवासियों को दो-चार होना पड़ता है। शहरवासियों की मानें तो शहर के यह हालात 1990 के दशक से हैं। इस पर तंवर ने भी संज्ञान लिया था लेकिन वक्त बीतता गया और सड़क जस की तस है।
बता दें कि व्यस्ततम मार्ग बेगू रोड पर मलागर सिंह पेट्रोल पंप से लेकर अग्रसेन स्कूल तक बनने वाले फोरलेन बनाने को लेकर काफी समय से टेंडर हो चुके हैं। निर्माण के लिए पिछले करीब एक पखवाड़े से रोड की एक साइड को उखाड़ दिया गया है, जबकि दूसरी साइड को नहीं उखाड़ा गया है। एक साइड से रोड का उखाड़ना वाहन चालकों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रोड किसी खतरे से खाली नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि कोई प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में मामला न हो, लेकिन अभी तक इस मार्ग की कोई सुध नहीं ली गई है।
वहीं रोड का एक साइड उखाड़ने के कारण उक्त रोड का हिस्सा काफी नीचा हो गया है। एक साइड नीचे होने के कारण अधिकतर वाहन चालक दूसरी साइड के ऊंचे मार्ग से ही अपने वाहन गुजारना पसंद करते हैं, जिससे अधिकतर समय रोड पर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। फसली सीजन होने के कारण स्थिति और भी विकट हो गई है। मंडी में फसलें लेने के लिए रोजाना ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का आवागमन होता है, जिससे हर समय हादसे की आशंका रहती है। आए दिन कोई न कोई हादसा होने के बाद भी प्रशासनिक व विभाग के अधिकारी नहीं जागते हैं।
अशोक तंवर की मेहनत भी पड़ गई फीकी
90 के दशक से इस रोड को कहीं न कहीं से उखाड़ कर लोगों के लिए समस्या पैदा करने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। पूर्व सांसद अशोक तंवर ने अपने कार्यकाल में इस रोड को चकाचक के लिए जहमत उठाई थी पर कहीं न कहीं से फिर भी इस रोड को उखाड़ने का सिलसिला जारी रहा। कभी सीवरेज लाइन तो कभी पेयजल लाइन ठीक करने के लएि इस रोड को बार-बार उखाड़ दिया जाता है। खास बात यह है कि रोड का जितना हिस्सा बनकर तैयार होता है उसके एक-दो माह बाद उसी क्षेत्र में से किसी समस्या के समाधान के लिए रोड को उखाड़ दिया जाता है जिससे एक समस्या नई पैदा हो जाती है। विभाग के कार्यकारी अभियंता पीके जिंदल ने कहा कि इस यह पूरा मार्ग फोर लेन बन जाएगा जिसके बाद किसी प्रकार की समस्या नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि निर्माण के लिए टेंडर हो गया है।
डेरा और राजस्थान का है मुख्यमार्ग
बेगू रोड का महत्व इसीलिए अधिक है क्योंकि इस रोड़ पर विश्व प्रसिद्ध डेरा सच्चा सौदा है। डेरा सच्चा सौदा में हर माह
लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से गुजरते हैं। इसके अलावा राजस्थान को हरियाणा से जोड़ने का भी यही मोर्ग है। यहां से सालासर धाम, खाटू धाम, जयपुर व अन्य शहरों में जाने के लिए इसी रोड से गुजरना पड़ता है। ऐसे में इस रोड की दुर्दशा से न केवल शहर वासियों को बल्कि लाखों अन्य लोगों को भी भारी परेशानी होती है।
फसली सीजन में किसानों को भी होती परेशानी
फसलों के सीजन में टूटी सड़क के कारण किसानों को भारी परेशानी होती है। इस रोड पर जिले के 50 से अधिक और सीमावर्ती राजस्थान के किसान भी सिरसा की मंडी में फसलें बेचने आते हैं। कपास और गेहूं की भरी ट्रॉलियां पलट जाती हैं जिससे किसानों की मेहनत धूल में मिल जाती है। अब गेहूं का सीजन पीक पर है और हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉलियां यहां से गुजरती हैं। किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा दूसरे वाहनों को भी भारी परेशानी होती है। दोपहिया वाहन चालक आए दिन गड्ढों में गिरने से चोटें लग रही हैं।
रोड के नीचे से गुजरती है पुरानी सीवरेज और पेयजल लाइन
इस रोड के नीचे से गुजरने वाली पेयजल और सीवरेज लाइन बहुत पुरानी हो चुकी है। 80 के दशक से पूर्व डाली गई ये लाइनें जगह-जगह से लीकेज रहती हैं। इसी कारण बार-बार सड़क को उखाड़ना पड़ता है। एक बार बनी हुई सड़क को उखाड़ने के बाद में दोबारा से कई माह तक निर्माण नहीं किया जाता और इतने में सड़क और ज्यादा खराब हो जाती है। इस रोड़ पर रहने वाले कपिल, मुकेश, भीम सिंह, बंसीलाल, सुरेश आदि ने बताया कि पिछले 20 सालों से तो वे देख रहे हैं यह रोड कहीं न कहीं से हमेशा उखड़ा रहता है। जहां से टुकड़े का निर्माण हो जाता है उसके बाद दूसरे विभागों वाले रोड को उखाड़ने आ जाते हैं।