बेघर नहीं करने की मांग को लेकर थेहड़ में रहने वाले सैकड़ों बच्चों ने शुक्रवार सुबह शहर में शांति मार्च निकाला। पहली से लेकर कक्षा दसवीं तक पढ़ने वाले बच्चे इस मार्च में शामिल हुए। बच्चों के माताएं भी उनके पीछे-पीछे चलती रहीं। प्रशासन को शांति मार्च की भनक लगते ही नगराधीश बिजेंद्र सिंह को सचिवालय से टाउन पार्क रवाना किया गया। तेज गर्मी के अंदर हाथों में बैनर लिए शहर के बाजारों में बच्चों को देखकर हर किसी का दिल पसीज गया। नगराधीश से भी यह देखा नहीं गया और उन्होंने डबवाली रोड स्थित लालबत्ती के पास ही बच्चों को रोका। बच्चों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। नगराधीश बिजेंद्र ने बच्चों को आश्वासन दिया कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक जरूर पहुंचाएंगे।
जानकारी के अनुसार सुबह सात बजे थेहड़ पर रहने वाले परिवारों के बच्चे एकत्रित होना शुरू हो गए। नौ बजे तक रानियां रोड पर सैकड़ों स्कूली बच्चे अपनी माताओं के साथ आ पहुंचे। इसके बाद हाथों में बैनर लेकर बच्चों ने शांति मार्च निकालना शुरू किया। बच्चों का साथ देने के लिए हजारों की संख्या में लोग उनके पीछे चलने लगे। रानियां रोड से शांति मार्च घंटा घर चौक, भादरा बाजार, सदर बाजार होते हुए लालबत्ती चौक पहुंचा। बच्चों को ज्ञापन सौंपने उपायुक्त कार्यालय जाना था लेकिन गर्मी में बच्चों की हालत प्रशासन से भी नहीं देखी गई। इसलिए नगराधीश को लालबत्ती चौक भेजा गया।
नगराधीश ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लिया और आश्वासन दिया कि सरकार मांगों पर गंभीरता दिखाएगी। थेहड़ निवासी रंधावा, अशोक, आत्माराम, विनय, अजय व मुनीष आदि का कहना है कि तीन दशकों थेहड़ पर मकान बनाकर रह रहे हैं। प्रशासन की तरफ से थेहड़ पर हर सरकारी सुविधाएं जैसे बिजली, पानी व सड़क दी हुई है। थेहड़वासी नगर परिषद को हाउस टैक्स भी देते हैं। शहर के छह वार्ड थेहड़ की जद में आते हैं। ऐसे में बस थेहड़ को पुरातत्व विभाग का क्षेत्र बताकर सरकार उन्हें उजाडना चाहती है। अगर थेहड़ पुरातत्व विभाग का क्षेत्र है तो सरकार ने उन्हें थेहड़ पर बसने क्यों दिया। सरकारी सुविधाएं क्यों दी और क्यों नेताओं ने वोट लेकर भरोसा दिया कि उन्हें किसी सूरत में उजाड़ा नहीं जाएगा।
600 जेसीबी, 15000 पुलिसकर्मी मांगे
जिला प्रशासन ने भी हर संभावित हालात को देखते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटाने के लिए 600 जेसीबी मशीन व 15 हजार पुलिस फोर्स मांगी है। घर से बेघर होने के करीब पहुंच चुके थेहड़वासी सरकार से अपनी अंतिम गुहार लगाने के लिए शुक्रवार को फिर से सड़कों पर उतरेंगे। रोष प्रदर्शन का नेतृत्व हजारों महिलाएं और उनके बच्चे करेंगे। थेहड़ वासियों को उम्मीद है कि हजारों महिलाओं व बच्चों की गुहार से सरकार का दिल पसीज जाएगा।
20 मई तक हटाने हैं मकान
20 जनवरी 2016 को हरियाणा सरकार की तरफ से हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया था कि 20 मई तक प्राचीन धरोहर थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटा दिया जाएगा। वीरवार को थेहड़ वासियों की तरफ से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच में स्टे लेने हेतु याचिका भी दायर की गई। याचिका पर सुनवाई 18 मई को होगी। थेहड़ संघर्ष समिति की प्रधान एडवोकेट संजू बाला का कहना है कि डबल बेंच से स्टे मिल गया तो थेहड़वासी 18 मई दिवाली की भांति मनाएंगे।
3046 परिवारों को दिए जा चुके हैं नोटिस
प्रशासन की तरफ से थेहड़ के 3046 परिवारों को नोटिस देकर 20 मई तक अपने मकान खाली करने का आदेश दिया गया है। थेहड़वासियों ने तीन बार सड़कों पर प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। लोगों का कहना है कि उन्हें घर से बेघर न किया जाए। दशकों पहले थेहड़ पर जब लोग मकान बना रहे थे, तब क्यों नहीं उन्हें रोका गया। सरकार ने थेहड़वासियों को हर प्रकार की सरकारी सुविधाएं दी हैं। नगर परिषद की तरफ से यहां रहने वालों से हाउस टैक्स वसूल किया जाता है। सरकार गरीबों को किसी भी सूरत में न उजाड़े। संघर्ष समिति के पदाधिकारी मनमोहन मिड्डा ने बताया कि थेहड़वासी शांति पूर्वक तरीके से बार-बार अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहे हैं। सरकार को हजारों परिवारों के बारे में सोचना चाहिए।
2012 से लटक रही है तलवार
सिरसा के थेहड़ में करीब 35 हजार लोग रहते हैं। थेहड़वासियों के सिर पर बेघर होने की तलवार वर्ष 2012 से ही लटक रही है। थेहड़ की जमीन पर अपना दावा करते हुए पुरातत्व विभाग ने अदालत में याचिका दायर करके इसे कब्जा मुक्त करवाने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने जिला प्रशासन से थेहड़ से अनाधिकृत निर्माण हटाने का आदेश दिया। जिला प्रशासन की तरफ से थेहड़ के 450 लोगों को नोटिस जारी करके 26 अक्टूबर 2012 तक अपने मकान खाली करने का हुक्म सुनाया। जिलाधीश की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि 20 अक्टूबर तक कब्जा न हटाने पर बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए जाएंगे और 26 अक्तूबर को मकानों को गिराकर कब्जा ले लिया जाएगा, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया था। थेहड़वासी सड़कों पर उतर आए और सिरसा में प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। थेहड़वासियों ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आठ नवंबर तक स्टे लगा दिया और साथ ही हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। सरकार की तरफ से मिले जवाब के बाद स्टे हटा लिया गया। 20 जनवरी 2016 को हरियाणा के अतिरिक्त महा अधिवक्ता ने हाईकोर्ट बताया कि आज से चार महीने के बीच अनाधिकृत निर्माण हटा दिया जाएगा।
ग्यारहवीं शताब्दी तक लोहे का दुर्ग था थेहड़
वर्तमान में शहर के उत्तरी दिशा में मिट्टी के टीले के रूप में थेहड़ विद्यमान है, यह टीला ग्यारहवीं शताब्दी तक लोहे का एक दुर्ग था। दसवीं शताब्दी से पहले किसी राजा ने दिल्ली की तरफ से आक्रमण रोकने के लिए हनुमानगढ़, सिरसा, बठिंडा और हांसी में विशाल किलों का निर्माण करवाया था। सिरसा में किले की ऊंचाई 130 फीट से अधिक और क्षेत्रफल पांच वर्ग किलोमीटर से अधिक था। कहा जाता है कि सिरसा शहर सरस्वती नदी के किनारे बसा था और नदी के स्थान बदलने और बड़ा तूफान आने से यह किला 1173 ईसवी में जीर्ण-शीर्ण हो गया था। वर्तमान में करीब 35 हजार से अधिक लोग इस इलाके में निवास करते हैं और यह क्षेत्र शहर के पांच वार्डों में आता है। हालांकि इस ऐतिहासिक धरोहर पर लोगों ने हजारों की संख्या में अवैध रूप से मकान बना रखे हैं। विशेष बात है कि बरसात के समय इस इलाके से अनेक प्रकार के अवशेष निकलते हैं। थेहड़ का अस्तित्व सदियों पुराना है, इसलिए यहां मुगल कालीन के अलावा बौद्ध कालीन वस्तुएं भी मिलती हैं।