हाईकोर्ट की एक डबल बेंच ने मंगलवार को थेहड़ मामले में नागरिक परिषद सिरसा द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 17 जून तक पूरे थेहड़ पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश जारी कर दिए हैं। नागरिक परिषद सिरसा के तहत शहर के 13 लोगों की ओर से परिषद के सचिव सुरेंद्र भाटिया ने भारत सरकार के खिलाफ नौ जून को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया था जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत सरकार, हरियाणा सरकार, पुरातत्व विभाग, डीसी सिरसा सहित एक दर्जन विभागों को समन जारी किए हैं। इस मामले में आगामी सुनवाई 17 को होनी है। कोर्ट ने 17 जून तक पूरे थेहड़ पर ही स्थगन आदेश दिया है, क्योंकि उक्त जनहित याचिका किसी एक व्यक्ति विशेष के पक्ष में न होकर पूरे थेहड़ के पक्ष में है। नागरिक परिषद द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव गुप्ता ने हाईकोर्ट में पैरवी की। जिन 13 लोगों की ओर से परिषद के सचिव सुरेंद्र भाटिया ने याचिका दी है, उनमें एलडी मेहता, डॉ. आरएस सांगवान, रमेश मेहता एडवोकेट, पवन बिश्रोई एडवोकेट, भूपेंद्र पन्नीवालिया, सुरेंद्र मिचनाबादी, डॉ. सुदीप मुंजाल, अमीर चावला, हीरालाल शर्मा, आरसी कसवां, रविंद्र मोंगा, तुलसीदास खेतरपाल शामिल है।
सर्वे टीम की रिपोर्ट पर टिका हैं थेहड़वासियों का भविष्य
थेहडवासियों को उजाड़ा जाए या नहीं, यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है और मामले की आगामी सुनवाई 17 जून को होनी है। पर थेहड़वासियों का भविष्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की टीम की रिपोर्ट पर टिका हुआ है जिसे सर्वे के बाद तैयार किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के हस्तक्षेप के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने एक टीम भेजकर थेहड़ का सर्वे करने का आदेश दिया था। उसी आदेश के तहत विभाग की एक टीम थेहड़ का सर्वे करने आई थी। टीम में हरियाणा पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक डॉ. बिनानी भट्टाचार्य, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के पुरातत्व विभाग के प्रो. डॉ. सुखदेव सैनी, सर्वे ऑफ इंडिया के उपनिदेशक डॉ. विनोद राणावत, सहायक निदेशक डॉ. रक्षत कौशिक शामिल थे। यदि टीम अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेख कर देती है कि थेहड़ में पुरातत्व महत्व का कुछ नहीं बचा है तो फिर थेहड़ के लोगों को राहत मिल सकती है।