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कन्या भ्रूण हत्या का कलंक को मिटाने के लिए तैयार कालूआना

Sun, 17 Jul 2016 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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पंचायत का फरमान - फोटो : bureau
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स्वच्छता के मामले में राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाला गांव कालूआना अब अपने ऊपर से कन्या भ्रूण हत्या का कलंक मिटाने को तैयार है। हम पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस गांव का लिंगानुपात साढ़े आठ सौ से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस बार महिला चौधरी के नेतृत्व वाली पंचायत ने कोख में कत्ल करने वाले परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का फरमान जारी करके अपने इरादे जता दिए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान की सरहद पर बसे गांव कालूआना की कुल आबादी 6613 है। वर्ष 2014 में लिंगानुपात 1000 : 851 थी। वर्ष 2015 में यह सुधरने की अपेक्षा गिरकर 1000 : 778 हो गई। वर्तमान में भी हालात सुधरते हुए प्रतीत नहीं होते। जो अब जून 2016 तक 813 है। कन्या भ्रूण हत्या का कलंक मिटाने के लिए इस बार गांव की पंचायत ने कड़ा कदम उठाया है। पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित करके कोख में बेटी का कत्ल करने वाले का सामाजिक बहिष्कार करने का ऐलान किया है। यहीं नहीं कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी देने वाले को 11 हजार रुपये का पुरस्कार देने की भी घोषणा की है। अपने फैसलों तथा कामों के लिए यह पंचायत हमेशा ही सुर्खियों में रही है। वर्ष 2007-08 में सरकार ने स्वच्छता मुहिम शुरू की। मुहिम से जुड़ते हुए पंचायत ने लीग से हटकर कार्य किया। ऐसा गांव बना, जहां प्रत्येक घर में शौचालय था। यहां तक की पानी निकासी के लिए पूरी व्यवस्था की गई। ब्लाक स्तर पर प्रथम आने पर गांव को दो लाख, जिला स्तर पर प्रथम रहने पर पांच लाख, राज्य स्तर पर प्रथम आने पर 20 लाख रुपये का पुरस्कार मिला।

 यही नहीं स्वच्छता के मामले में ही तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने हिसार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस गांव को दो लाख रुपये की राशि तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया था। पुरस्कार के रूप में इस गांव को 29 लाख रुपये मिले। इस राशि को पंचायत ने स्वच्छता, शिक्षा तथा हरियाली पर खर्च किया। यहीं नहीं इससे खुश होकर तत्कालीन उपायुक्त युद्धवीर सिंह ख्यालिया ने बीआरजीएफ के तहत गांव को 20 लाख रुपये से चार नई बसें दी। गांव की तरक्की में पूर्व सरपंच जगदेव सहारण ने अहम रोल अदा किया। अभी वह मुकाम हासिल करना दूर था, जिसकी गांव को लंबे अरसे तक प्रतीक्षा थी। वर्ष 2006 में मनरेगा की शुरुआत हुई। 2011 में पांच वर्ष पूरे होने पर दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। अच्छा कार्य करने पर पूरे देश की 11 पंचायतों को सम्मानित किया गया। गांव कालूआना पूरे उत्तर भारत की इकलौती पंचायत थी, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सम्मानित किया था। सफलता के झंडे गाढने में जगदेव सहारण के नेतृत्व वाली कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति अहम रोल अदा कर रही है। यह समिति हर साल करीब पचास लाख रुपये  बेटियों की शिक्षा पर खर्च कर रही है। समिति सात बसें चला रही है। जिनमें बैठकर करीब एक दर्जन से अधिक गांवों की बेटियां पढ़ने कालूआना ही नहीं, सिरसा तथा ओढ़ां जाती हैं। बेटियों से एक पाई तक नहीं ली जाती।
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कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति बेटियों को पढ़ाने में भरसक प्रयास कर रही है। पंचायत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। बेटियों को बचाने के लिए मुहिम छेड़ेंगे। साथ में घर-घर जाकर बेटियों को स्कूल तक लेकर आएंगे।
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जगदेव सहारण, अध्यक्ष, कालूआना वेलफेयर शिक्षा समिति



 
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