नगर परिषद पर पहले इनेलो का एकछत्र राज रहा है पर इस बार भाजपा के चक्रव्यूह में फंसी इनेला दो सीटों पर सिमटकर रही गई। दूसरी ओर हलोपा और कांग्रेस मिलकर सत्ता हासिल करने की उम्मीद पाले हुए थे पर उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिर गया। आजाद उम्मीदवारों की लाटरी खुलती दिख रही है जिन्हें भाजपा के साथ जाने में ही फायदा होगा। नगर में कमल फूल खिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली सीएम के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपडा का कद और बढ़ गया है। दूसरी ओरनिवर्तमान परिषद उपाध्यक्ष लीलाधर सैनी के पुत्र और पुत्रवधू को हार का सामना करना पड़ा।
नगर परिषद सिरसा में पिछले बार इनेलो ने बहुमत हासिल किया था पर उसका कार्यकाल घोटालों में सिमटकर रह गया। भाजपा इसी घोटाले को सामने रखकर जनता के सामने जा रही थी। भाजपा ने इनेलो के गढ़ में सेंध लगाने के लिए व्यूह रचा। भाजपा ने सभी वार्ड में उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। पहले भाजपा में टिकट को लेकर बिखराव सा नजर आ रहा था पर सीएम के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपडा ने इसका भी तोड़ निकाल लिया था। यह चुनाव राहुल सेतिया के नेतृत्व में लड़ा गया जिसमें अन्य नेताओं को भी शामिल किया गया। बनिया और पंजाबी वोट की बिसात पर भाजपा की ओर से रणनीति तैयार की गई थी जो कारगर भी रही। इस गठजोड़ का नुकसान हरियाणा लोकहित पार्टी को हुआ। जाप पात की राजनीति से दूर रहने का दावा करने वाली भाजपा ने अपने तरकश से आखिर में जातपात वाला तीर निकाला। चुनाव प्रचार के लिए चार मंत्रियों को बुलाया गया और उन्होंने उन वार्डो में जनसभाएं की जहां पर उनकी बिरादरी के लोगों की संख्या ज्यादा थी और वे इसमें कामयाब भी रहे। जहां पर भाजपा उम्मीदवारों की स्थिति कमजोर थी वे ताकतवर बनकर उभरे। उधर हलोपा सुप्रीमो गोपाल कांडा और लीलाधर सैनी के गठजोड़ से दोनों को ही फायदा माना जा रहा था पर इनेलो ने वार्ड 12 में लीलाधर सैनी के पुत्र और वार्ड 13 में पुत्रवधू की घेराबंदी की हुई थी। जिससे दोनों वार्ड में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इन दोनों वार्ड की सीटे भाजपा की झोली में गई।
दूसरी ओर कांग्रेस ने नगर परिषद चुनाव को गंभीरता से लिया और चुनाव से पहले कांग्रेस के दोनों धड़े एक ही मंच पर आ गए। इससे लगा कि कांग्रेस इस बार फायदे में रहेगी। कुछ सीटों पर कांग्रेस ने हलोपा से अंदरखाने हाथ मिलाया । हलोपा के खाते में छह और कांग्रेस के खाते में पांच सीटे गई। लोग कयास लगा रहे थे कि यह गठबंधन नगर की सत्ता पर काबिज हो सकता था। आजाद के खाते में तीन सीटे गई इनमें से दो उम्मीदवार ऐसे थे जिन्हें भाजपा टिकट नहीं दे पाई पर उन दोनों को भाजपा अपने ही खाते में गिन रही है। भाजपा ने यह चुनाव पार्टी चुनाव चिन्ह कमल के निशान पर लड़ा जिसका भी उसे फायदा मिला। उधर इनेलो के कद्दावर नेताओं ने इस चुनाव में प्रचार करने के बजाए करनाल रैली पर ज्यादा जोर दिया जिसका खामियाजा इनेलो को उठाना पड़ा और जो सीटे इनेलो के पक्ष में आ सकती थी उन्हें भाजपा छीनकर ले गई।