क्रेंद और प्रदेश सरकार की ओर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा सिरसा के महिला कॉलेज में छात्राओं से साथ बेमानी सा लग रहा है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इस कॉलेज को अस्तित्व में आए हुए डेढ़ साल हो गया है पर अब तक यहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है। छात्राओं की संख्या के अनुसार यहां पर 45 शिक्षक होने चाहिए। मात्र आठ शिक्षक हैं वो भी दूसरे कॉलेजों से डेपुटेशन पर आए हैं। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे में छात्राओं को अपने दम पर ही पढ़ कर परीक्षाएं देनी पड़ रही हैं। अब 26 नवंबर से फिर परीक्षाएं शुरू हैं, ऐसे में छात्राओं की नैया कैसे पार लगेगी यह तो राम भरोसे ही है।
बेटियों की पढ़ाई को लेकर चिंतित शहर वासियों की लंबी मांग पर प्रदेश सरकार ने शहर में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए नए राजकीय महिला कॉलेज की मांग को तो पूरा कर दिया पर इस कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई। जिस कारण हजारों छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
सरकार ने 11.88 करोड़ रुपए की लागत से महिला कॉलेज का नया भवन भी बनवाया है, जिसका निर्माण अब अंतिम अवस्था में हैं। महिला कॉलेज की छात्राओं को पढ़ाई करवाने के लिए नियमित प्राध्यापकों को लगाना तो दूर इनका एक पद ही स्वीकृत नहीं किया है। इतना ही नहीं कॉलेज में तो प्राचार्य ही नियमित रूप से नहीं लगाया गया है। फतेहाबाद के भोड़ियाखेड़ा स्थित सरकारी कॉलेज की प्राचार्या डॉ. स्नेहा नंदा को ही इसका अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे सप्ताह में तीन दिन ही यहां आ पाती हैं। प्रदेश सरकार की इसी लापरवाही का नतीजा है कि राजकीय महिला कॉलेज की छात्राएं उधार लिए गए प्राध्यापकों के माध्यम से अपना पाठ्यक्रम पूरा करने को मजबूर हैं। प्राचार्य भी नियमित न मिलने के कारण उनकी आधारभूत समस्याओं का समाधान भी नहीं हो पाता। इस मामले में प्राचार्या डॉ. स्नेह नंदा ने कहा कि शिक्षकों की व गैर शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला सरकार स्तर का होता है इसमें वे कुछ नहीं कर सकती।
गौरतलब है कि राजकीय नेशनल कॉलेज की विंग में पढ़ने वाली छात्राओं की बरसों पुरानी मांग को पूरा करते हुए सीएम तत्काल मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा ने शहर में राजकीय महिला कॉलेज बनाने की घोषणा की थी, जिसके बाद भाजपा सरकार ने तीन जून 2015 को राजकीय महिला कॉलेज की स्थापना की। लेकिन इन डेढ़ वर्षों के कार्यकाल में अब तक सरकार द्वारा यहां पर नियमित प्राध्यापक का एक भी पद स्वीकृत नहीं किया है। इन डेढ़ वर्षों में बीए व बीकॉम में पढ़ने वाली यहां की छात्राओं का पाठ्यक्रम पूरा करवाने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग समय-समय पर डेपुटेशन के माध्यम से यहां पर प्राध्यापकों को भेजता आ रहा है। इनकी संख्या भी एक कॉलेज के लिए नियमों के तहत लगाए जाने वाले प्राध्यापकों की संख्या का पांचवां हिस्सा ही हैं। कॉलेज में नियमित प्राध्यापकों के पद स्वीकृत करने तथा नियमि प्राध्यापक भेजे जाने के लिए कॉलेज प्रशासन द्वारा उच्चतर शिक्षा विभाग, सीएम के राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा, भाजपा की अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गणेशीलाल को अनेक बार मांग पत्र सौंपे, लेकिन आज तक उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया।
भवन भी जर्जर
पहले महिला विंग के तौर पर और अब डेढ़ साल से महिला कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं की पढ़ाई तो दूर की बात है। उनकी जिंदगी भी दांव पर है। वे जिस भवन में पढ़ रही हैं उस भवन को 15 साल पूर्व कंडम घोषित कर खाली करवा लिया गया था। अंग्रेजों के जमाने में बना यह भवन खंडहर बन चुका है। गनीमत यह रही कि अब तक कोई हादसा नहीं हुआ। कभी भी खंडहर भवन गिर सकता है। ऐसे में हजारों छात्राओं की जिंदगी भी दांव पर जिस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
45 नियमित शिक्षकों की जगह मात्र आठ डेपुटेशन पर
छात्राओं की प्रत्येक विषय में संख्या के अनुसार जो वर्कलोड अनुसार कॉलेज में अंग्रेजी के 9, इतिहास के 2, गणित के 3, वाणिज्य के 6, भूगोल के 7, अर्थशास्त्र के 2, हिंदी के 4, लोक प्रशासन के 1, राजनीतिक शास्त्र के 2, पर्यावरण विज्ञान के 1, मनोविज्ञान के 4, शारीरिक शिक्षा के 3 तथा पंजाबी का 1 प्राध्यापक होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में इस कॉलेज में डेपुटेशन पर केवल वाणिज्य, राजनीतिक शास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल, इतिहास का एक-एक प्राध्यापक तथा अंग्रेजी के दो प्राध्यापक ही हैं। अभी हाल ही में कॉलेज की पहली खेलकूद प्रतियोगिता के कारण केवल शारीरिक शिक्षा विभाग की एक प्राध्यापिका को मात्र तीन दिन के लिए ही आदमपुर से यहां डेपुटेशन पर भेजा गया था, जो कि अब वापिस जा चुकी हैं।
विद्यार्थी-प्राध्यापक की वास्तविक स्थिति
विषय विद्यार्थी संख्या जरूरी पद डेपुटेशन रिक्त
अंग्रेजी 1433 9 2 7
हिंदी 1249 4 0 4
गणित 341 3 0 3
इतिहास 452 2 1 1
वाणिज्य 404 6 1 5
भूगोल 449 7 1 6
अर्थशास्त्र 580 2 1 1
लोक प्रशासन 152 1 0 1
राजनीतिक शास्त्र 465 2 1 1
पर्यावरण विज्ञान 698 1 0 1
मनोविज्ञान 229 4 1 3
शारीरिक शिक्षा 1651 3 0 3
पंजाबी 200 1 0 1
कुल 45 8 37