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महिलाओं को भाया सरकारी अस्पताल

Wed, 21 Sep 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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सरकारी अस्पताल की सेवाएं महिलाओं को ज्यादा रास आ रही हैं। नागरिक अस्पताल आने वाले मरीजों में महिलाओं की संख्या काफी अधिक है। इतना ही नहीं 33 प्रतिशत डिलीवरी प्राइवेट अस्पतालों में और 67 प्रतिशत सरकारी अस्पतालों में हो रही हैं। ओपीडी बढ़ने के साथ साथ 25 प्रतिशत दवाओं की खपत भी बढ़ गई है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग के हिसार स्थित वेयर हाउस में 432 दवाओं की अपेक्षा सौ दवाओं का स्टाक है ऐसे में अस्पताल अपने स्तर पर दवाओं की खरीदकर काम चला रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से नवंबर 2014 में नि:शुल्क उपचार योजना की शुरुआत की गई थी। ऑपरेशन भी फ्र ी में किए जाने लगे, लेकिन फिर भी परिजन मरीज को उपचार के लिए प्राइवेट अस्पताल ले जाना उचित समझते थे। सरकारी अस्पताल की सफाई और उपचार में हीला-हवाली को लेकर लोग वहां जाने से कतराते थे। जैसे जैसे डॉक्टरों ने स्थिति संभाली तो मरीजों ने अस्पताल आना शुरू किया। इतना ही नहीं हर प्रकार के ऑपरेशन अस्पताल में नि:शुल्क किए जाने लगे। यहां तक की सरकारी अस्पताल में डॉ. कुलदीप सांई ने एक महिला का कूल्हा बदला जिस पर बहुत कम खर्च आया था। इसके बाद डॉ. रोहित डूमरा ने भी ऐसा ही किया।

वर्ष 2015 में नागरिक अस्पताल में 237178 मरीजों ने उपचार करवाया। जिसमें 109296 पुरुष और 127882 महिलाएं थी। जनवरी 2015 में 16425, फरवरी में 19072, मार्च में 19436, अप्रैल में 18406, मई में 21448, जून में 21185, जुलाई में 21864, अगस्त में 20633, सितंबर में 21138, अक्तूबर में 20794, नवंबर में 17151 और दिसंबर में 19629 लोगों ने उपचार करवाया। वर्ष 2016 में जनवरी से अगस्त माह तक 155270 ने उपचार करवाया जिसमें से 70074 पुरुष और 85196 महिलाएं रही। जनवरी 2016 में 16193, फरवरी में 18412, मार्च में 21048, अप्रैल में 18595, मई में 20568, जून में 20849, जुलाई में 20610 और अगस्त में 18995 ने उपचार करवाया।
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260 प्रकार की दवाएं हैं अस्पताल में
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. वीरेश भूषण ने बताया कि अस्पताल में 260 प्रकार की दवाएं मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही है अगर कोई दवा कम पड़ जाती है तो स्थानीय स्तर पर गठित लोकल परचेज कमेटी दवाओं की खरीदकर मरीजों तक दवाएं पहुंचाती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी बढ़ने से दवाओं की खपत करीब 25 प्रतिशत बढ़ गई है।
सरकारी अस्पताल में पांच रुपये की पर्ची पर उपचार, दवाएं और हर प्रकार की जांच नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। हरियाणावासी के हर प्रकार के ऑपरेशन फ्री में किए जाते हैं। एक्सरे और अल्ट्रासाउंड फ्री किए जा रहे हैं। सीटी स्कैन मशीन खराब है ऐसे में बाहर से यह करवाए जा रहे हैं। बीपीएल कार्ड धारक से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है जबकि अन्य मरीज को 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है जिसे स्वास्थ्य विभाग भरता है।

सरकारी अस्पताल में प्रसव बढ़ी उपलब्धि
दूसरी ओर सरकारी अस्पताल में डिलीवरी बढ़ी है। डॉ. वीरेश भूषण ने बताया कि 33 प्रतिशत डिलीवरी प्राइवेट अस्पताल में और 67 प्रतिशत सरकारी अस्पताल में हो रही है जो एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। प्रसूता को घर से अस्पताल और अस्पताल से घर तक पहुंचाने के लिए नि:शुल्क एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जा रही है। दूसरी ओर प्राइवेट अस्पताल में सामान्य डिलीवरी के  पांच से दस हजार रुपये, सिजेरियन के 25 हजार रुपये से अधिक, रसौली निकालने के 10 से 20 हजार रुपये, हार्निया के 20 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं पर ये सभी ऑपरेशन सरकारी अस्पताल में फ्री किए जाते हैं। यही वजह है कि सरकारी अस्पताल में ओपीडी बढ़ रही है। नागरिक अस्पताल में बच्चा वार्ड में आधुनिक नर्सरी स्थापित की गई है। जहां पर प्राइवेट अस्पताल से भी बच्चे आने लगे है जबकि प्राइवेट अस्पताल में पांच हजार से दस हजार रुपये प्रतिदिन वसूल किए जाते हैं।
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वर्ष     महिला    पुरुष     कुल
2015    127882 109296    237178
2016 (अगस्त तक) 85196    70074    155270
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