सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में आयोजित यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज पर आधारित फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के दूसरे दिन ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की तरफ से प्रो. बीके शर्मा ने बतौर रिसोर्स पर्सन पहुंचे। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मूलभूत मानवीय आकांक्षाओं, समग्र विकास और शिक्षा की भूमिका पर विस्तृत विचार साझा किए।
ह्यूमन वैल्यूज की अवधारणा पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका लक्ष्य व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। प्रो. बीके शर्मा ने कहा कि यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज केवल पुस्तकीय अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि इन्हें व्यवहार और जीवनशैली में उतारना आवश्यक है।
प्रो. बीके शर्मा ने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में यदि इन मूल्यों को पाठ्यक्रम के साथ जोड़ा जाए, तो विद्यार्थी न केवल अच्छे पेशेवर बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनेंगे। इस अवसर पर ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के आब्जर्वर की भूमिका में गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार के प्राध्यापक डॉ. चरणजीत मदान और डीन स्टूडेंट वेलफेयर रहे।
कार्यक्रम के डायरेक्टर प्रो. राजकुमार, प्रो. राजबीर दलाल, प्रो. काशिफ किदवई ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को आरंभ किया। आब्जर्वर डॉ. चरणजीत मदान ने कहा कि जीवन में सही समझ, संबंधों की महत्ता, भौतिक सुविधाओं का संतुलित उपयोग और पारस्परिक सुख मानवीय मूल्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
व्यक्तिगत सामंजस्य, संबंधों में सामंजस्य और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही सार्वभौमिक मानव मूल्यों की नींव है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे शिक्षण में मूल्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर छात्रों में जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिकता के गुणों का विकास करें। इस अवसर पर सेल के एडवाइजर प्रोफेसर श्यामलाल फुटेला, कोऑर्डिनेटर डॉ. रविंद्र आदि ने मौजूद रहे।
इसी क्रम में ब्रह्माकुमारिज केंद्र से आई बहन बिंदु ने अध्यात्म और जीवन मूल्यों के बीच संतुलन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अध्यापक स्वयं यदि सकारात्मक सोच और मूल्यों को अपनाएं, तो विद्यार्थियों पर उसका गहरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से मानसिक शांति व सशक्त व्यक्तित्व निर्माण के लिए प्रेरित किया।