जिले में कोरोना संक्रमण के बाद अनलॉक-2 में रोडवेज की बसें चलाने का आदेश जारी कर दिया था। इस दौरान मुख्यालय के आदेश पर सवारियों को स्क्रीनिंग के बाद ही बस में बिठाया जाता था। लेकिन बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने स्क्रीनिंग बंद कर दी और सवारियों को बिना स्क्रीनिंग बसों में बैठाया गया।
कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में लॉकडाउन लगाया गया, जिस दौरान रोडवेज का सरकार ने पूर्ण रूप से चक्का जाम कर दिया था। अनलॉक-2 में रोडवेज मुख्यालय ने बसों में निर्धारित सवारियों के साथ बसों को दौड़ाना शुरू कर दिया था। वहीं इस दौरान सभी सवारियों की स्क्रीनिंग भी जरूरी कर दी थी। जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी पांच टीमें गठित कर बस अड्डे पर लगाई थी। जो आने वाली सभी सवारियों की जांच करती थी। टीम सुबह पांच बजे से लेकर रात 11 बजे तक बस अड्डे पर अपनी ड्यूटियां देती थी। लेकिन बुधवार तक सवारियों की संख्या बढ़ने और सभी बसों को रूटों पर दौड़ाने के बाद विभाग ने स्क्रीनिंग बंद करवा दी है। अब सवारियों को बिना स्क्रीनिंग ही बसों में बैठाया जा रहा है।
स्क्रीनिंग मशीनें हुई खराब
स्वास्थ्य विभाग की टीमों के अलावा रोडवेज परिचालकों के पास भी थर्मल स्क्रीनिंग के लिए मशीनें दी हुई है। लेकिन वह मशीनें अब काम नहीं कर रही है। परिचालक जब सवारियों को टिकट देते हैं तो उस समय स्क्रीनिंग भी की जाती है। लेकिन जब परिचालक एक या दो सवारियों की स्क्रीनिंग करते हैं, जिसके बाद मशीनें बंद हो जाती है। मशीनें न चलने के बाद सवारियों को बिना स्क्रीनिंग ही बसों में बैठा दिया जाता है। जबकि अब न ही तो बसों में सामाजिक दूरी बन रही है और न ही बस अड्डे पर।
कोट
बस अड्डे पर परिचालक अब सवारियों की जांच कर रहे हैं अगर कोई संदिग्ध मिलता है तो इस पर वह स्वास्थ्य विभाग को सूचना देंगे। कंटेनमेंट जोन बढ़ने के कारण टीम को हटाया गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग अभी भी सतर्कता से काम कर रहा है और बस अड्डे से रिपोर्ट ले रहा है।
-डॉ. सुरेंद्र नैन, सिविल सर्जन स्वास्थ्य विभाग सिरसा।