संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए 17 दिन बीत चुके हैं लेकिन निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी पुस्तकों को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से केवल निरीक्षण की औपचारिकता पूरी की जा रही है जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जिलेभर के कई निजी स्कूल एनसीईआरटी की सस्ती किताबों के बजाय प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी पुस्तकें लगवा रहे हैं। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। कई जगहों पर एक कक्षा की किताबों का सेट 2 से 3 हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है।
शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलेभर में 8 टीमों का गठन किया है, जो निजी स्कूलों का निरीक्षण कर रही हैं। अब तक शहर के करीब 10 निजी स्कूलों की जांच भी की जा चुकी है। हालांकि, इन निरीक्षणों के बावजूद किसी भी स्कूल पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
हर साल बनती है ऐसी स्थिति, नहीं होती कार्रवाई : अभिभावकों का कहना है कि हर साल इसी तरह की स्थिति बनती है, जहां स्कूल संचालक अपनी मनमानी करते हैं और उन्हें महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूलों ने विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव भी बनाया हुआ है जिससे उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ती हैं।