पद्मश्री सम्मान के बाद गांव पहुंचीं सविता पूनिया को मिठाई खिलातीं उनकी मां। स्रोत : परिजन
डिंग मंडी। भारतीय महिला हॉकी टीम की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी सविता पूनिया पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के बाद वीरवार को अपने गांव जोधकां पहुंचीं। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री मिलने के बाद गांव लौटने पर परिवार में खुशी का माहौल रहा। घर पहुंचने पर उनकी माता ने तिलक लगाकर और मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया।
सविता के साथ उनके भाई, भाभी और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे। परिवार ने उनकी उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया। सविता के पिता महेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी बेटी ने कठिन मेहनत और संघर्ष के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। सविता ने पूरे देश में सिरसा और हरियाणा का नाम रोशन किया है। हमारी इच्छा है कि गांवों की अन्य बेटियां भी उससे प्रेरणा लें और अपने सपनों को पूरा करें।
गांव में स्वागत न होने पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि होना तो चाहिए था लेकिन उनको किसी से कोई नाराजगी नहीं है। सविता की सफलता से यदि अन्य बेटियां भी प्रेरणा लेकर खेल और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं तो यह उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी और स्वागत होगा।
सविता पूनिया ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने उनके सफर में सहयोग किया। ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकती हैं, जरूरत केवल मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास की है। मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा बेटियां खेलों से जुड़ें। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता। पद्मश्री सम्मान मिलने से उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है तथा वह भविष्य में भी खेल और समाज के क्षेत्र में योगदान देने का प्रयास करती रहेंगी।
सोशल मीडिया पर नेताओं और विभिन्न संगठनों ने दीं बधाइयां
पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के बाद सविता पूनिया के गांव पहुंचने पर किसी बड़े स्वागत समारोह का आयोजन नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार गांव में न तो कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया और न ही प्रशासन का कोई प्रतिनिधि स्वागत के लिए पहुंचा। परिवार के सदस्यों ने ही उनका स्वागत किया। हालांकि सोशल मीडिया पर नेताओं और विभिन्न संगठनों ने उन्हें बधाई दी, लेकिन गांव में उनके आगमन पर अपेक्षित स्तर का स्वागत नहीं होने की चर्चा पूरे क्षेत्र में रही। ग्रामीणों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली खिलाड़ी के सम्मान में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम होना चाहिए था।