डेरा जगमालवाली में साधसंगत को दिया आत्मचिंतन और सेवा का संदेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। डेरा जगमालवाली में 31 अक्तूबर और 1 नवंबर को मैनेजर साहिब का जन्मदिन मनाया गया। यह आयोजन भंडारे और विशाल सत्संग के रूप में पूरी श्रद्धा एवं हर्षोल्लास के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधसंगत ने पहुंचकर सत्संग का लाभ उठाया।
संत बिरेन्द्र सिंह ने संगत को संबोधित किया। उन्होंने मैनेजर साहिब के जीवन, विचारों और सिद्धांतों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। संत ने कहा कि संतों के जन्मदिन पर भौतिक उपहार के बजाय भजन-सिमरन करना सच्ची भेंट है।
संत बाहरी दिखावे से नहीं बल्कि सच्चे सिमरन से प्रसन्न होते हैं। इंसान को सांसारिक कार्यों की तरह भजन-सिमरन के लिए भी समय निर्धारित करना चाहिए। संत सिमरन के बदले सांसारिक सफलता की गारंटी नहीं देते।
वे आत्मिक सुख का मार्ग दिखाते हैं। जीवन में दुख-परेशानियां आती रहती हैं। सिमरन से आत्मा इतनी मजबूत होती है कि व्यक्ति हर परिस्थिति का सामना कर पाता है।
जन्मदिन पर करना चाहिए आत्मचिंतन
संत ने जीवन की नश्वरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इंसान हर गुजरते दिन के साथ अपनी अंतिम मंजिल के करीब पहुंच रहा है। जन्मदिन पर केवल केक काटकर खुशियां मनाने के बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए। बीते वर्ष में भजन-सिमरन और निष्काम सेवा में क्या हासिल किया, इस पर विचार करें। इंसान का जीवन क्षणभंगुर है और वह अहंकार में डूबा रहता है।
परमात्मा का वास भीतर
संत बिरेन्द्र सिंह ने बताया कि परमात्मा को पहाड़ों या जंगलों में खोजने की आवश्यकता नहीं है। वह इंसान के अपने शरीर रूपी मंदिर में ही विराजमान है। संतों का उद्देश्य धर्मों के नाम पर विवाद पैदा करना नहीं है। वे सोई हुई आत्मा को जगाकर मानवता को सही मार्ग दिखाते हैं। कबीर साहिब जैसे संतों ने भी ध्यान और सिमरन को परमात्मा प्राप्ति का मार्ग बताया है।