सिरसा। पहाड़ों में बारिश के बाद घग्गर का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। इसके कारण रानियां, बड़ागुढ़ा, रोड़ी व सिरसा के गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। घग्गर में मौजूदा समय में 12 हजार क्यूसेक पानी है। इसके चलते प्रशासन ने घग्गर के साथ लगते सभी गांवों के लोगों हो अलर्ट पर रहने के निदेश दिए हैं।
चोपटा की कुतियाना माइनर में बुधवार सुबह दरार आने के कारण 20 एकड़ भूमि में पानी भर गया था और किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। एसडीएम राजेंद्र सिंह ने घग्गर के तटबंधों का जायजा लिया और ग्रामीणों के साथ बातचीत की। एसडीएम ने ग्रामीणों से चौकन्ने रहने और थोड़ा भी कहीं रिसाव तटबंधों पर नजर आने पर तुरंत प्रशासन को सूचित करने के लिए कहा है।
वहीं, ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ही तटबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया है, ताकि बाढ़ की स्थिति पैदा न हो। हालांकि, नेजाडेला के आसपास 50 एकड़ के आसपास भूमि में पानी भर चुका है। अधिकारियों के अनुसार, घग्गर के बढ़ते जलस्तर को कंट्रोल करने के लिए ओटृ हेड के गेटों को खोलने का काम जारी है।
चार गेट मौजूदा समय में खोल दिए गए हैं, ताकि घग्गर का जलस्तर कम किया जा सके। यदि जलस्तर में ज्यादा कमी नहीं आती है तो बुधवार देर शाम को दो ओर गेटों को खोलने की योजना प्रशासन ने बनाई है, ताकि रोड़ी व बडागुढ़ा और सिरसा क्षेत्र के ग्रामीणों को बाढ़ की स्थिति से बचाया जा सके।
पहले 15 किलोमीटर के तटबंध पंचायत के भरोसे
रोड़ी क्षेत्र से पंजाब से आने वाला घग्गर का पानी हरियाणा में प्रवेश करता है। यहां से हरियाणा के भीतर पहले 15 किलोमीटर के तटबंध पंचायत के भरोसे हैं। 24 घंटे के अंदर तीन फीट पानी बढ़ने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्योंकि पंचायत के स्तर पर इन बांधों को ज्यादा मजबूत नहीं किया गया है। पंजाब के सरदूलगढ़ स्थित घग्गर पुल पर लगी गेज मशीन के अनुसार मंगलवार को जलस्तर 16 फीट दर्ज किया गया था, जो बुधवार सुबह अचानक बढ़कर करीब साढ़े 19 फीट तक पहुंच गया। गौरतलब है कि रोड़ी क्षेत्र में 20 फीट जलस्तर को बाढ़ का खतरे का निशान माना जाता है। ऐसे में इस क्षेत्र के किसानों को डर सताने लगा है।
प्रशासन ने शुरू करवाई मुनादी
घग्गर के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन ने घग्गर के साथ-साथ लगते गांवों में मुनादी करवानी शुरू कर दी है। ग्रामीणों से अपील की जा रही है कि वह घग्गर की स्थिति को देखते हुए उसके आसपास न जाएं। कहीं भी पानी का रिसाव दिखे तो प्रशासन को सूचित करें। साथ ही प्रशासन ने किसानों का सहयोग भी मांगा है कि वह तटबंधों पर रात के समय निगरानी रखें। प्रशासन ने फ्लड कंट्रोल रूम नंबर 01666-248882 या उपायुक्त कैंप कार्यालय दूरभाष नंबर 01666-248880 का नंबर जारी कर दिया है।
ग्रामीणों के साथ एसडीएम ने की बातचीत
निरीक्षण के दौरान एसडीएम राजेंद्र कुमार ने ग्रामीणों से भी बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। उन्होंने कहा कि नदी के जलस्तर पर निरंतर दिन रात नजर रखी जा रही है और प्रशासनिक टीमें नियमित रूप से घग्गर नदी पर गश्त कर रही हैं । उन्होंने बताया कि आमजन को किसी भी तरह घबराने की जरूरत नहीं है। फिर भी नदी के आसपास स्थित गांवों के ग्रामीणों को तटबंध टूटने या पानी के रिसाव का खतरा हो तो संबंधित पटवारी, ग्राम सचिव, सिंचाई विभाग को सूचित कर सकते हैं।
इस प्रकार है हालात
- घग्गर की फ्लडी ड्रेनों में पानी ज्यादा छोड़ा नहीं जा सकता है। इन ड्रेनों में पानी कम कर दिया गया है।
- कुतियाना माइनर जहां टूट गई थी, वहीं रंगाई नाला में पानी ओवरफ्लो होने के हालात बने हुए हैं।
- मंगलवार को गांव खैरेकां की ओर तटबंध के साथ पानी पहुंच गया है।
- राजस्थान के लिए ओटू हेड के चार गेट खोल दिए गए हैं।
- किसानों के साथ प्रशासन ने तालमेल बनाना शुरू कर दिया है।
- तटबंधों के अंदर की भूमि पर बिजाई करने वाले किसानों को फसल डूबने का सबसे ज्यादा खतरा है।
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घग्गर नदी के बढ़ते जलस्तर पर फरवाईं खुर्द व पनिहारी क्षेत्र का निरीक्षण किया गया है। घग्गर नदी के तटबंधों का निरीक्षण करने के उपरांत संबंधित विभाग के अधिकारियों को इन्हें मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को कहा है कि नदी में पानी की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। तटबंध की कमजोर जगहों को तुरंत प्रभाव से दुरुस्त करवाने का काम विभाग शुरू करें। कोई कोताही न बरती जाए।
- राजेंद्र कुमार, उपमंडल अधिकारी, सिरसा।
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अभी तक स्थिति पूरी तरह से कंट्रोल में है। 12 हजार क्यूसिक के करीब पानी घग्गर में मौजूदा समय में है। पानी का कम करने के लिए ओटू हेड के गेट खोल दिए गए हैं, ताकि राजस्थान को पानी जाए। फ्लडी ड्रेनों की स्थिति को कंट्रोल करने का कार्य जारी है। ग्रामीणों से भी धैर्य बनाए रखने की अपील की गई है। तटबंधों को मजबूत करने का कार्य किया जा रहा है।
- रघुबीर सिंह, एसडीओ, सिंचाई विभाग।