आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी खेल के प्रति समर्पण हो तो सफलता दूर नहीं रहती इस बात को सच साबित कर रही है शहर की उभरती जूडो खिलाड़ी भूमि। स्कूल स्तर से शुरुआत कर अब वह जिला व राज्य स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही है। भूमि की मेहनत व लगन ने न सिर्फ उसके परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि इलाके की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा का मार्ग भी प्रशस्त किया है।
भूमि का सफर आसान नहीं रहा। शुरुआती दिनों में ट्रेनिंग की सुविधाएं कम थीं और संसाधनों की कमी के कारण नियमित अभ्यास में दिक्कतें आती थीं। लेकिन स्थानीय स्कूल के जूडो कोच और स्टेडियम के प्रशिक्षक की मदद से भूमि ने अपने खेल को निखारना शुरू किया। नियमित अभ्यास, तकनीकी ड्रिल और शारीरिक फिटनेस के प्रति उसकी गंभीरता ने जल्द ही उसे विभिन्न प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन की राह दिखाई।
-
पढ़ाई के साथ करती है अतिरिक्त अभ्यास
भूमि रोजाना स्कूल की पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त अभ्यास करती है। प्रतियोगिता के समय वह वजन-प्रबंधन और स्किल-बिल्डिंग पर विशेष ध्यान देती है। उसकी मेहनत का नतीजा है कि वह जिला स्तर से होते हुए अब राज्य स्तर तक कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है और लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
-
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेलना लक्ष्य
परिवार की सीमित आय के बावजूद माता-पिता ने भूमि के सपनों को उड़ान देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। मां सिलाई कर कुछ आय बढ़ाती हैं, वहीं पिता कठिन परिस्थितियों में भी फेरी लगाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। दोनों का मानना है कि उनकी बेटी खेल में आगे बढ़े, यही उनके जीवन का सबसे बड़ा गर्व है। भूमि का लक्ष्य अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना है। कोचों का कहना है कि अगर भूमि को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं, अभ्यास का उचित समय और संसाधन मिलें तो वह भविष्य में राज्य ही नहीं, देश का भी नाम रोशन कर सकती है।