हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा में रविवार को मासिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की भेजी गई 16वीं चिट्ठी को पढ़कर सुनाया गया। इसमें डेरामुखी ने अनुयायियों को जेल से बाहर आने का संकेत दिया है।
डेरामुखी ने चिट्ठी की अंतिम लाइन में लिखा कि वह अनुयायियों से रू-ब-रू होने के लिए तड़प रहा है। ये संदेश सुनकर सत्संग हॉल में बैठी डेरामुखी की मुख्य शिष्या हनीप्रीत भी भावुक हो गई और आंसू भी निकल आए।
डेरा सच्चा सौदा में रविवार को सत्संग भंडारा हर्षोल्लास और मानवता भलाई कार्यों के साथ मनाया। नामचर्चा में अलग-अलग राज्यों से संगत ने शिरकत की। इस दौरान फूड बैंक मुहिम के तहत 75 अति जरूरतमंदों को राशन किट और क्लॉथ बैंक मुहिम के तहत 75 बच्चों को वस्त्र वितरित किए गए। इसके अलावा पक्षी उद्धार मुहिम के तहत 175 सकोरे दिए गए।
कार्यक्रम के दौरान डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की ओर से 16वीं चिट्ठी भी भेजी गई। डेरा प्रमुख ने पत्र में संगत को सत्संग व भंडारे की बधाई देते हुए लिखा कि आप सब सुमिरन, अखंड सुमिरन तथा नामचर्चा चर्चा सत्संग में हिस्सा लिया करो। आप दुनिया में कोई भी काम-धंधा करते हैं, बिजनेस-व्यापार करते हैं, किस लिए करते हैं?
अपने शरीर के लिए, बाल-बच्चों के लिए, और किसी चीज के लिए तो नहीं करते आप। हां, सत्संगी जो हैं, वो परहित परमार्थ करते हैं, ये तो बेमिसाल है, ये तो बात ही अलग है। इनके अलावा दुनिया में तो ये ही मकसद होता है कि शरीर के लिए, या फिर औलाद के लिए बनाया जाए।
मां-बाप के लिए प्यार अब कम होता जा रहा है, तो ये सारे कर्म आप करते रहते हैं और इन कर्मों से आपको लगता है कि जीवन जीने का उद्देश्य पूरा हो रहा है, मकसद हमारा यही है। इस दौरान सत्संग भंडारे को लेकर बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री भी चलाई गई, जिसे सभी ने ध्यानपूर्वक देखा व सुना।
नामचर्चा की समाप्ति पर हजारों सेवादारों ने आई हुई साध-संगत को लंगर-भोजन और प्रसाद छका दिया। उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा के 75वें स्थापना दिवस 29 अप्रैल को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने 15वीं चिट्ठी में मई महीने को लेकर पावन वचन फरमाए थे।