पिछले पंद्रह सालों से कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए प्रयासरत गांव सांवतखेड़ा के पूर्व सरपंच रणजीत सिंह का कहना है कि हरियाणा शिक्षा विभाग का सिलेबस ही लड़का-लड़की में अंतर पैदा कर रहा है।
पहली कक्षा में ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है कि राम स्कूल जा, राधा पोछा लगा। बेटियों के प्रति ऐसी सोच से कहीं न कहीं भावनाएं आहत होती हैं।
मानसिक पटल पर जगह बनाने से कन्या भ्रूण हत्या जैसी समस्या का जन्म होता है।
वे बृहस्पतिवार को पंजाब के निकटवर्ती गांव चकरूलदू सिंह वाला स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर मुख्यातिथि छात्र-छात्राओं को संबोधित कर रहे थे।
सेमिनार का आयोजन डबवाली के एनजीओ अपने ने किया था। जिला सिरसा में कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए बनी कमेटी के चेयरमैन रहे रणजीत सिंह ने कहा कि सिलेबस से बेटियों को नीचा दिखाने वाले शब्दों को हटाने के लिए वे शिक्षा विभाग के डायरेक्टर से भी मिले थे।
लेकिन आज तक ऐसे शब्दों को नहीं हटाया गया। शब्द जस की तस पढ़ाए जा रहे हैं, जो चुभते हैं। इसे इस तरह भी लिखा जा सकता है कि राम-राधा स्कूल जा।
लेकिन शिक्षा विभाग सुधार करने को तैयार नहीं। उन्होंने अपने गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि करीब पांच साल पहले गांव में 100 बेटों के पीछे 63 बेटियां जन्म लेती थी।
आंगनबाड़ी, आशा वर्करों की मदद से गर्भवती महिलाओं पर नजर रखी। महिलाओं को जन्म देने के लिए जागरूक किया। आज उसी का परिणाम है कि 100 बेटों के मुकाबले 123 बेटियों ने जन्म लिया है।
उन्होंने कहा कि पहले समाज में सती प्रथा थी, फिर दहेज के लिए महिलाओं पर अत्याचार होने लगे। उस जमाने को वर्तमान ने पीछे छोड़ दिया। अब तो कोख में कत्ल होने लगे हैं।
रूह को कंपा देने वाली वारदात को अंजाम देकर कातिल तौलिया से हाथ पोंछकर शराफत का नकाब चढ़ा लेते हैं।
इस मौके पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के बच्चों ने हाथ उठाकर बेटी
बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर
प्रिंसिपल अशोक कुमार बिंद्रा, वाइस प्रिंसिपल हरदीप सिंह ने भी बच्चों को
संबोधित किया। मंच का संचालन राजनीतिक शास्त्र के प्रवक्ता विजय गर्ग ने
किया।
इस मौके पर एनजीओ अपने के अध्यक्ष मथरा दास चलना, पैटर्न चीफ तथा
डबवाली जन सहारा सेवा संस्था के अध्यक्ष आरके नीना मौजूद थे।
महंगा हो गया अल्ट्रासाउंड, बची बेटियों की जान
कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ मुहिम खड़ी करने वाले रणजीत सिंह सांवतखेड़ा का कहना है कि अभियान के चलते गंदे धंधे में संलिप्त लोगों पर मंदी की मार पड़ी है।
ऐसे लोगों ने अपना कारोबार नहीं छोड़ा। लेकिन अल्ट्रासाउंड करने के बाद रिपोर्ट के रेट जरूर बढ़ा दिए हैं। पहले रिपोर्ट पांच या छह हजार रुपये लेकर देते थे। अब उसी रिपोर्ट के 20 से 25 हजार रुपये ऐंठ रहे हैं। यह काम महंगा होने से, कई परिवार पीछे हटे हैं। ऐसे में कई बेटियों की जान बच गई।
गीत से किया प्रहार
उन्होंने बेटियों के लिए खुद का लिखा गीत बोझ मेरा बाबुला न जाणी, रूक्खी-सुक्खी खा लूंगी भी गाया। पूर्व सरपंच के अनुसार यह गीत उन्होंने उस समय लिखा, जब उसके देखते-देखते एक पिता अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट में बेटी का जिक्र आते ही जमीन पर गिर पड़ता है। बेटी के नाम पर छूटे पसीने देखकर उसे लिखने पर मजबूर कर दिया।
राजनीतिक गुमराह करते हैं
जिला सिरसा के तत्कालीन उपायुक्त वी. उमाशंकर तथा डॉ. जे. गणेशन के साथ मिलकर कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए कार्य शुरू करने वाले रणजीत सिंह का कहना है कि राजनीतिज्ञ लोग गुमराह करते हैं। अगर ये अच्छे हों तो सामाजिक कुरीति को जड़ से खत्म किया जा सकता है।