गेहूं का उठान नहीं होने के कारण चौपटा क्षेत्र के खरीद केंद्रों पर श्ुाक्रवार रात हल्की बूंदाबांदी से लाखों क्विंटल गेहूं भीग गया। प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल बारिश के बाद सामने आ गई। ग्रामीण क्षेत्र के खरीद केंद्रों पर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं होने के कारण गेहूं की ढेरियां भी भीग गई।
किसानों ने अपने स्तर पर तिरपाल आदि की व्यवस्था की और गेहूं को भीगने से बचाया, पर खरीदा गए गेहूं की कौन सुरक्षा करता, यह भीग गया। शुक्रवार रात हुई बारिश से नाथूसरी चौपटा खरीद केंद्र पर डेढ़ लाख बैग, कागदाना में 90 हजार बैग, शक्कर मंदोरी में 50 हजार बैग, कुतियाना में 60 हजार बैग भीग गए। इसके अलावा खुली ढेरियां भी भीगी हैं। हालांकि खरीद से पूर्व मार्केट कमेटी की ओर से सभी आढ़तियाें व खरीद एजेंसियों को तिरपाल की व्यवस्था करने के लिए लिखित रूप में निर्देश दिए थे। इतना ही नहीं, एजेंसियों की ओर से खरीद करने के बाद उठान नहीं किया जा रहा है।
नियम अनुसार खरीदे गए गेहूं का 72 घंटे में उठाना होता पर ठेकेदारों की मनमानी के आगे किसी की एक नहीं चलती और खुले आसमान के तले लाखों क्विंटल गेहूं पड़ा हुआ है। अभी भी मौसम खुला नहीं है, यदि जोरदार बारिश आ गई तो जिले में लाखों क्विंटल गेहूं भीगने से खराब हो जाएगा।
चौपटा में खरीदे गए गेहूं में 96 हजार बैग हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के हैं। बाकी बिना तोला हुआ गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। ऐसे में बादल मंडराने और तेज बारिश की आशंका से आढ़ती और किसान परेशान हैं। 21 अप्रैल से शुरू खरीदारी के बाद अब तक मात्र 30 हजार बैगों का ही उठान हो पाया है।
कागदाना खरीद केंद्र पर हरियाणा वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रभारी आदराम जाखड़ का कहना है कि धिंगतानियां गांव में बने नए गोदाम के कारण दिक्कत आ रही थी, अब वहां पर कमियां पूरी कर दी गई हैं और वहां पर गेहूं जाना शुरू हो गया है। अब जल्दी उठान हो जाएगा। रही बात बारिश से गेहूं भीगने की तो आढ़तियों को लाइसेंस देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि उनके पास तिरपाल व कैरेट का प्रबंध होना चाहिए।