बढ़ते तापमान से पौधों की जड़ों में दीमक लगने के साथ फूल व तानों में तेला चेपा जैसी बीमारियां बढ़ रही थीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
रानियां। मंगलवार को मौसम में हुए अचानक परिवर्तन के साथ हल्की बूंदाबांदी से किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई।
मौसम में बढ़ रही गर्मी के चलते रबी के फसलों में कई प्रकार की बीमारियां व पौधों के सूखने की समस्या सामने आने लगी थी। इससे किसानों को फसलों की गिरती पैदावार की चिंता सता रही थी। एक ओर जहां किसानों को भाखड़ा नहर की बंदी के चलते गेहूं, जौ व चना की फसल में सिंचाई की चिंता सा रही थी तो वहीं दिन और रात के समय में बढ़ते तापमान से पौधों की जड़ों में दीमक लगने के साथ फूल व तानों में तेला चेपा जैसी बीमारियां बढ़ रही थीं। यह किसान पर आर्थिक बोझ के साथ गिरती पैदावार के संकेत थे।
मंगलवार देर शाम तेज हवा के साथ हुई हल्की बारिश से कुछ स्थानों पर गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई। लेकिन हल्की बूंदाबांदी से वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ी है। इससे फसलों की रंगत, बढ़वार व चमक लौटने लगी है। इससे किसानों को गेहूं, जौ, सरसों व चना जैसी फसलों से अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है। किसानों का कहना है कि रबी की फसलों को अभी और ज्यादा बरसात की जरूरत है। बूंदाबांदी से अगले 4 से 5 दिन तक ही मौसम में नमी व ठंड रहेगी जबकि रबी की फसलों को 15 मार्च तक वातावरण में नमी और कम तापमान की जरूरत होती है।
हालांकि, क्षेत्र में हुई बरसात ने वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ा दी। इससे तापमान में लगभग 2 से 3 डिग्री कमी देखने को मिली। रानियां के आसपास के क्षेत्रों में करीब 4 से 5 एमएम बारिश दर्ज की गई। मंगलवार की बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है। अगले कुछ दिनों तक फसलों में सिंचाई की जरूरत कम पड़ेगी। किसानों का मानना है कि मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में अच्छी बारिश होती है तो सरसों की फसल में अच्छी पैदावार की संभावना बन सकती है।
किसानों ने बताया कि कल की बारिश के साथ तेज हवा से कई जगह गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई है। अब तक फसलों में कोई नुकसान की संभावना नहीं है। किसानों का कहना है कि फिलहाल हल्की बारिश संजीवनी का काम करेगी।