नगर परिषद की चेयरपर्सन शीला सहगल और सहायक संजय गांधी के खिलाफ ठेकेदारों ने वीरवार को नगर परिषद परिसर में प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि रिश्वत मांगने वाले पर अगर दो दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी भी की।
ठेकेदार विजय झूंथरा, दलीप, पवन, अजीत भादू, प्रदीप, अंकित, उमेश गुप्ता, जगदीश, कृष्ण, पवन कुमार, विनोद, अशोक, कैंडी जैन, सुभाष आदि ने आरोप लगाए कि नगर परिषद में कमीशन खोर बैठे हैं, जो ठेकेदारों को काम नहीं करने देते। विजय झूंथरा ने आरोप लगाया कि नगर परिषद की चेयरपर्सन शीला सहगल के सहायक संजय गांधी हमारे द्वारा किए गए कार्यों की पेमेंट के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में सरेआम रिश्वत की मांग करता है और उसे कोई नहीं रोकता।
झूंथरा ने बताया कि कुछ समय पूर्व उसने नप से नियमानुसार टेंडर प्राप्त करके गली विकास स्कूल वाली, गली रचना पैलेस के पीछे वाली, हुडा चौक से रेलवे फाटक, सूरतगढ़िया चौक से शिव चौक, गली गुरदेव सिंह चेयरमैन वाली, चाचाण मंदिर से गोशाला के मुख्य द्वार तक का निर्माण कार्य किया था। इन कार्यों का कुछ भुगतान करीब 85 लाख रुपये नप की ओर से जारी कर दिया गया था, जबकि शेष 54 लाख की अदायगी कमेटी की ओर से की जानी है।
झूंथरा का आरोप है कि इस अदायगी के लिए जब उसने 31 जनवरी की शाम को कमेटी में बात की, तो उससे चेयरपर्सन शीला सहगल के सहायक संजय गांधी ने पांच लाख रुपये की मांग की, जो कि एक रिश्वत ही है। इससे मना करने पर संजय गांधी ने बिलों के भुगतान न करने की बात वरिष्ठ अधिकारियों से कही। इसी के चलते नप में यह दो दिन का धरना दिया गया है। झूंथरा सहित ठेकेदारों की मांग है कि सभी ठेकेदारों की पुरानी पेमेंट तुरंत क्लीयर की जाए।
ये रखीं मांगें
ठेकेदार दलीप का एक करोड़ 92 लाख रुपये का जो टेंडर कैंसल करने की कोशिश की जा रही है, उसका वर्क ऑर्डर प्रधान हस्ताक्षर कर धरने पर ही आकर दें। इसके अतिरिक्त पांच लाख की मांग करने के संबंध में संजय गांधी धरने पर आकर माफी मांगें। ठेकेदारों ने चेतावनी दी कि अगर दो दिनों के इस धरने में उनकी मांगें न मानी गईं, तो उन्हें मजबूरन भूख हड़ताल पर बैठना होगा। इस मौके पर अनेक ठेकेदार मौजूद रहे।
सभी आरोप गलत और निराधार : सहगल
सभी आरोप गलत और निराधार हैं। मैं अभी नगर परिषद की चेयरपर्सन बनी हूं और पेमेंट के लेन-देन को लेकर ऐसी कोई बात नहीं है। जो निर्माण कार्य सही तरीके से हुए हैं, उसकी पेमेंट नगर परिषद की ओर से जरूर दी जाएगी। ठेकेदार दलीप की ओर से एक करोड़ 92 लाख रुपये का टेंडर कैंसल का लगाया गया आरोप गलत है, क्योंकि इस टेंडर को लेकर घपलेबाजी का मामला सामने आया था, जिसके संबंध में विजिलेंस जांच के लिए डीसी सिरसा को लिखा जा चुका है।
जब यह टेंडर ही कैंसल हो गया है तो वर्क ऑर्डर के लिए किसी भी प्रकार की रिश्वत की मांग का सवाल ही नहीं पैदा होता। सिरसा की जनता ने उन्हें चेयरपर्सन का दायित्व सौंपा है। जनता के हकों पर किसी को डाका नहीं डालने दूंगी। भले ही कोई कितने और कैसे आरोप लगाए, लेकिन बिना जांच और पड़ताल के एक पाई नहीं दी जाएगी। भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा। विजिलेंस जांच में खरा पाए जाने पर ही सरकारी कोष से धन जारी किया जाएगा।
शीला सहगल, चेयरपर्सन, नगर परिषद सिरसा
मुझ पर ठेकेदारों की ओर से बार-बार पांच लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया जा रहा है, जोकि गलत व निराधार है। दरअसल शीला सहगल ने नगर परिषद की चेयरपर्सन बनने के बाद हो रहे निर्माण कार्यों की जांच करवानी शुरू की थी, ताकि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की धांधली न हो। इसलिए हो सकता है कि यह धरना उस जांच प्रक्रिया पर दबाव बनाने के लिए दिया जा रहा हो।
सहायक संजय गांधी
गलियों की मॉनीटरिंग नहीं हुई : एमई
नगर परिषद के पालिका अभियंता (एमई) राकेश पूनिया ने स्पष्ट किया कि जिन गलियों के भुगतान को लेकर बवाल मचा है, उनकी अभी मॉनीटरिंग ही नहीं हुई है। इसके साथ ही ठेकेदार विजय झूंथरा द्वारा जिन बिलों को पास करने की एवज में घूस का आरोप लगाया गया है, उनके बिल ही प्रधान के समक्ष पेश नहीं किए गए हैं।