संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। दूध की दर बढ़ाने की मांग पर पिछले तीन दिनों से जारी किसानों और पशुपालकों का विरोध प्रदर्शन शनिवार को समाप्त हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिन का समय दिया है।
पशुपालकों ने कहा कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो 17 अक्तूबर को जाट धर्मशाला में हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के पशुपालक व डेयरी संचालक एकत्रित होकर रणनीति तय करेंगे।
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे किसान नेता जसबीर सिंह भट्टी ने कहा कि तीन दिन तक चला धरना उनके लिए सफल रहा लेकिन सरकार की ओर से उनकी मांगों को लेकर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई।
पशुपालकों का कहना है कि दूध उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि दूध के मौजूदा दर में उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा। ऐसे में दूध के खरीद मूल्य में उचित बढ़ोतरी जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान वीटा मिल्क प्लांट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश मेहता के साथ भी प्रदर्शनकारियों की बातचीत हुई थी जिसमें उन्होंने अंबाला में लागू दर को उच्च अधिकारियों से बातचीत के बाद लागू करने का आश्वासन दिया है।
इस पर भी किसानों ने कहा कि केवल आगे से मार्जिन लागू करना पर्याप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि जिस अवधि में दूध के दर में अंतर रहा है, उसकी भरपाई भी वीटा की ओर से ब्याज सहित की जानी चाहिए।
पशुपालकों ने कहा कि दूध उत्पादन में चारा, पशु आहार, दवाइयों और श्रम समेत विभिन्न खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में मौजूदा खरीद मूल्य में पशुपालकों के लिए पर्याप्त लाभ की गुंजाइश नहीं बचती। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थाओं से दूध के दर को लागत के अनुरूप तय करने की मांग की।