पिछले 19 दिनों से लघु सचिवालय में प्राकृतिक आपदा के कारण खराब
फसलों के मुआवजे की मांग को लेकर धरनारत सैकड़ों किसानों की तरफ प्रशासन ने
जरा भी ध्यान नहीं दिया, लेकिन धरने पर विराजमान एक वृद्ध किसान के हठ से
जिला प्रशासन परेशान है।
102 वर्षीय धनपत सैकड़ों किसान साथियों के साथ एक
मार्च से धरनास्थल पर भूख हड़ताल शुरू करेगा। प्रशासन नहीं चाहता कि धनपत
भूख हड़ताल पर बैठे। उसकी उम्र को देखकर प्रशासन को डर है कि अगर 102
वर्षीय धनपत को भूख हड़ताल के दौरान कुछ हो गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे
और मामला तूल पकड़ सकता है। इसलिए प्रशासन की तरफ से शहर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुभाष कुमार अपनी टीम के साथ रविवार दोपहर धरनारत
किसानों के बीच पहुंचे। थाना प्रभारी ने धरनारत किसानों व हरियाणा किसान
मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा से कहा कि धनपत को धरने से
उठाया जाए और उसे भूख हड़ताल में शामिल न किया जाए।
वे आधा घंटे तक प्रशासन
की तरफ से धनपत को उठाने की गुहार लगाते रहे। उन्होंने किसानों से उनका
दर्द पूछा और उनके साथ चाय पीकर समझाने का काफी प्रयास किया। हरियाणा किसान
मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह भारूखेड़ा ने बताया कि प्रशासन नहीं
चाहता कि गांव तरकांवाली निवासी किसान धरने पर बैठा रहे और भूख हड़ताल में
शामिल न हो। वृद्ध किसान ने प्रशासन को स्पष्ट जवाब दिया है कि वह धरनास्थल
से नहीं हटेगा और एक मार्च से अपने सैकड़ों किसानों के साथ भूख हड़ताल
शुरू करेगा।
पांच हजार किसानों की होगी महापंचायत
सरकार की अनदेखी के चलते धरनारत किसानों ने 20 फरवरी को धरनास्थल पर एक
मार्च महापंचायत बुलाने का निर्णय लिया था। एक सप्ताह से किसानों ने जिलेभर
के गांवों से संपर्क अभियान चलाया हुआ है। जिलेभर के 340 गांवों से एक
मार्च को करीब पांच हजार किसान लघु सचिवालय में होने वाली महापंचायत में
शामिल होंगे।
किसान नेता ओम प्रकाश सिहाग का कहना है कि संपर्क अभियान से
किसान अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुए। किसानों को लग रहा है कि सरकार
पूरी तरह से उनकी अनदेखी कर रही है। ओलावृष्टि के कारण खराब हुई फसलों का
मुआवजा लेना पीड़ित किसानों का अधिकार है। किसान अपना हक मांग रहे हैं, भीख
नहीं।
सुध नहीं लेने पर उपायुक्त के प्रति रोष
धरनारत किसानों में उपायुक्त के प्रति खास रोष है। उनका कहना है कि वे
उपायुक्त से बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन वे उनके बीच आकर बातचीत करने
को ही तैयार नहीं। हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रह्लाद सिंह का
कहना है कि पिछले 19 दिनों से धरनारत किसानों के पास से होकर उपायुक्त
कार्यालय में आती और जाती हैं।
उन्होंने एक बार भी किसानों की दशा पर ध्यान
देने की जहमत नहीं उठाई। डीसी शरणदीप कौर बराड़ जिले की मुखिया हैं। वे
किसानों के बीच आकर लिखित में ठोस आश्वासन दे सकती हैं, लेकिन न तो उन्हें
किसानों की दशा की परवाह है और न ही सरकार को। उन्होंने कहा कि जब तक लिखित
में ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक किसानों का संघर्ष जारी रहेगा।