- किसानों का धरना जारी, किसान बोले-दूसरे गांवों की तरह क्लेक्टर रेट का पांचगुना दे प्रशासन
- प्रशासन की वेल्यूअर एजेंसी की कार्यप्रणाली मिली संदिग्ध, किसानों ने जताई नाराजगी
फोटो - 24,25
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। दक्षिण हरियाणा बिजली निगम की ओर से 132 केवीए मुख्य लाइन को गुजारने के लिए चार गांवों के खेतों से टॉवर लगाए जा रहे हैं। पनिहारी, फरवाई, कासनखेडा, हांडी खेड़ा के ग्रामाीणों को क्लेक्टर रेट के हिसाब से पैसा जमीन का मिल चुका है। मगर, गांव वेदवाला के ग्रामीणों को जमीन का मुआवजा बहुत कम दिया जा रहा है।
हैरानी की बात है कि वर्ष 2025 के क्लेक्टर रेट के हिसाब से भी मुआवजा नहीं मिल रहा है। इससे नाराज किसान जहां धरना दे रहे हैं वहीं उपायुक्त से लेकर बिजली निगम के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
मामले में कोई सुनवाई नहीं होने पर वेदवाला के लोगों ने काम रुकवा दिया है। काम रुकने के बाद इसी मामले में दक्षिण हरियाणा बिजली निगम के रेस्ट हाउस में एसई पुष्पेंद्र सिंह और एसडीएम राजेंद्र सिंह की अगुवाई में मंगलवार को किसानों के साथ बैठक की। किसानों को इस बैठक से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसे में किसानों ने घोषणा की कि उनका वेदवाला में धरना जारी रहेगा।
मंगलवार को सुबह 12 बजे एसडीएम राजेंद्र सिंह, एसई पुष्पेंद्र सिंह व किसानों के बीच वार्ता शुरू हुई। एसडीएम राजेंद्र सिंह ने कहा कि वे किसानों का पक्ष सुनने के लिए आए हैं। इस सारे मामले में वे उपायुक्त के समक्ष उनकी पैरवी करेंगे। उनका मकसद रहेगा कि किसानों के साथ किसी प्रकार का कोई अन्याय न हो।
किसान बिंदर सिंह, यशपाल, जसप्रीत आदि ने बताया कि गांव पनिहारी में जमीन का क्लेक्टर रेट 16 लाख रुपये है। पांचगुना बढ़ाकर 80 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। सरकार के नियमों के अनुसार, सरकार की ओर से क्लेक्टर रेट, मार्केट रेट, वेल्यूवेशन व स्टॉम्प रेट के आधार पर रेट तय किया जाता है। इनके आधार पर तय नहीं होता है तो डीसी कमेटी गठित करता है। वह कमेटी रेट गठित करेगी।
किसानों ने कहा कि हमें पूर्व अधिकारियों ने रेट के हिसाब से दस्तावेज करने की बात कही थी और स्टॉम्प व सेल डीडी के साथ अन्य दस्तावेज आपके सामने है। उन्होंने हमें बिना अवगत करवाए, विभाग की ओर से स्पेशल कमेटी गठित कर वेल्यूअर लगा दिए। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 20 जून को सौंपी है और उससे पहले 7 मई को सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी। उन गाइडलाइनों को इसमें समाहित नहीं किया गया है।
किसानों ने कहा कि इतना ही नहीं, वेल्यूअर किसी भी क्षेत्र में नहीं गया और दिल्ली में बैठे-बैठे तीन लाख रुपये की फीस लेकर बचकाना रिपोर्ट बनाकर दे दी। यह पूरी तरह से गलत है।
किसानों ने कहा कि हमारी मांग है कि दूसरे गांवों को जहां क्लेक्टर रेट पर पांचगुना दिया गया है, वह दिया जाए। इसके अलावा, कम से कम 3 करोड़ 31 लाख रुपये तक प्रति एकड़ जरूर दिया जाए। शहर के वेदवाला के पास होने के कारण हर छह माह में रेट बड़े स्तर पर बढ़ रहे हैं। हाल ही में वेदवाला क्षेत्र में प्रति एकड़ चार करोड़ 31 लाख रुपये में जमीन बिकी है। रजिस्टर्ड डील हुई है।
उन्होंने बताया कि मई माह में 3 करोड़ 31 लाख 240 रुपये की रजिस्ट्री हुई है। तीन करोड़ के स्टॉम्प हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी जमीन का रेट 90 लाख रुपये के आसपास है और 10 प्रतिशत क्लेक्टर रेट बढ़ाकर दिया है। हमारी जमीन शहर के साथ लगती है और कॉमर्शियल रेट वहां पर है। किसानों ने कहा कि सरकार सोनीपत, झज्जर को दे सकती है तो सिरसा के किसानों के साथ क्यों अत्याचार किया जा रहा है।
एसडीएम ने एसई पुष्पेंद्र सिंह से पूछा कि इस मामले में वह अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं। एसई ने कहा कि वह सरकारी प्रक्रिया से बाहर नहीं जा सकते हैं। सभी लोगों की सुनवाई करने के बाद एसडीएम ने कहा कि वह इस पॉलिसी से बाहर नहीं जा सकते हैं। वह किसानों का सारा पक्ष उपायुक्त के समक्ष रख देंगे और उनकी पैरवी करेंगे।
किसानों का मजाक उड़ाते हैं अधिकारी
एक किसान ने एसडीएम से कहा कि साहब, कई बार हम एसई व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं। यह हमसे बैठक करने के बाद हंसते हैं और हमारा मजाक उड़ाते हैं। यह हमें आदमी समझते ही नहीं है। किसानों की जमीन जा रही है और उन्हें पूरा पैसा ही नहीं मिल रहा है। परिवार में आपसी विवाद खड़ा कर दिया है। एसई साहब आपस में लोगों को मरवाना चाहते हैं। अंग्रेज चले गए हैं लेकिन इन जैसे लोग यहां आज भी हैं। उन्होंने कहा कि कैथल, झज्जर आदि जिलों में गांवों को क्लेक्टर रेट के हिसाब से करोड़ों रूपये मिले हैं। मुख्यमंत्री भी इसी हिसाब से पैसा किसानों को देने की बात कहते हैं मगर अधिकारी कोई सुनवाई नहीं करते हैं।
वेल्यूअर की रिपोर्ट पर उठे सवाल
अधिकारियों व किसानों की बैठक में सामने आया कि डीसी के आदेशों पर गठित किए गए वेल्यूअर ने क्लेक्टर रेट में बड़ी गड़बड़ी कर रखी है। वेदवाला क्षेत्र में पड़ने वाली नई रिहायशी कॉलोनी अमरा ग्रीन का प्रति गज रेट 3000 रुपये के आसपास दर्शाया गया है जबकि सरकार से पास रेट रिहायशी जगह का 24 हजार और कॉमर्शियल का 51400 रुपये गज निर्धारित किया गया है। इतना ही नहीं, इस सारी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा विरोधाभास उस समय पैदा हो गया जब दूसरे वेल्यूअर ने अलग रेट दे दिया। दिल्ली के एक वेल्यूआर ने प्रति एकड़ 1 करोड़ 58 लाख रुपये बताया तो दूसरे ने 3 करोड़ 68 लाख रुपये बताया। दोनों रिपोर्ट के रेट में बड़े स्तर पर अंतर होने के कारण किसान से लेकर निजी कॉलोनी वाले भी हैरान रह गए। यही कारण रहा कि मंगलवार को रेस्ट हाउस में हुई बैठक में तीसरे वेल्यूअर की रिपोर्ट खोलने से किसानों ने एसडीओ को इन्कार कर दिया।
यह है मामला
अधिकारियों के अनुसार, चार गांवों से 51 बिजली की मुख्य लाइन के टाॅवर गुजारे जाने हैं। तीन गांवों में बिजली के टॉवर गुजारने का काम तेजी से चल रहा है जबकि गांव वेदवाला के लोगों की ओर से जमीन का सही मुआवजा नहीं मिलने के कारण विरोध जारी है। टॉवर लगाने का काम बंद हैं। अधिकारियों के अनुसार, गांव वेदवाला की जमीन पर 30 टॉवर लगाए जाने हैं। जमीन का सही मूल्य नहीं मिलने के कारण धरना जारी है।
कोटस
किसानों के साथ बैठक हुई है। मौजूदा प्रक्रिया से बाहर नहीं जा सकते हैं। हालांकि, किसानों का पक्ष उपायुक्त के समक्ष रखेंगे ताकि उचित समाधान हो सके।
-राजेंद्र सिंह, एसडीएम।
कोटस
विभाग की ओर से नियमानुसार प्रक्रिया अमल में लाई गई है। किसानों को अवगत करवाया गया था। दो एजेंसियों ने वेल्यू लगाई है और अपनी रिपोर्ट दी है। उन्होंने किस आधार पर रिपोर्ट दी है उस पर कुछ नहीं कह सकते हैं।
-पुष्पेंद्र सिंह, एसई, बिजली निगम