चोपटा क्षेत्र के कई गांवों से किसान वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे लघु सचिवालय, बोले- 16 दिन बंदी के बाद आठ दिन पानी से कैसे होगी सिंचाई
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चोपटा। संयुक्त किसान संगठन के बैनर तले मंगलवार को चोपटा क्षेत्र के किसानों ने आंदोलन का बिगुल बजाया। यह आंदोलन नहरों और माइनरों में पानी की कटौती के विरोध में शुरू किया गया है।
विभिन्न गांवों के किसान फतेहाबाद के लघु सचिवालय पहुंचे और पानी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। खेड़ी, कुम्हारिया, रामपुरा नवाबाद, चाहरवाला, जोगीवाला, नाथूसरी कलां और कागदाना सहित कई गांवों के किसान वाहनों के काफिले के साथ धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए।
अनाज मंडी में एकत्रित किसानों ने रवाना होने से पहले पानी की मांग को लेकर रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने किसान एकता और किसान जिंदाबाद के नारे लगाए। किसानों ने कहा कि 16 दिन पानी बंद रखने के बाद केवल आठ दिन पानी से सिंचाई कैसे होगी।
हरदत, लादूराम पुनिया, ओमप्रकाश, प्रहलाद बेनीवाल, देवीलाल, हरी सिंह मंडा, देशबंधु बैनीवाल, बलराम सहारण, प्रेम ठाकर, नेकीराम, भजनलाल, दलीप बुडानिया, कृष्ण ज्याणी खेड़ी और रोहताश पूनिया ने किसानों को संबोधित किया।
उन्होंने बताया कि नहरों व माइनरों में 16 दिन पानी बंद रखने के बाद केवल आठ दिन पानी छोड़ने का कार्यक्रम किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। गेहूं और सरसों की बोआई के महत्वपूर्ण सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई गांवों में पीने के पानी की समस्या भी सामने आने लगी है।
पेयजल और सिंचाई की समस्या
मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पानी की अगली बारी के लिए किसानों को करीब 40 दिन इंतजार करना पड़ेगा। इतने लंबे अंतराल में फसलों की जरूरत के मुताबिक सिंचाई करना मुश्किल होगा। इसका सीधा असर खेती और ग्रामीण जनजीवन पर पड़ेगा। ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। दिवाली जैसे पर्व के सीजन में भी लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने मांग की है कि नहरों और माइनरों में पानी की आपूर्ति का अंतराल कम किया जाए। इससे फसलों की सिंचाई के साथ-साथ गांवों में पेयजल की जरूरत भी पूरी हो सकेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी होने तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।