बिजली निगम कार्यालय तक निकाला मार्च-किसानों ने कहा-आठ की जगह मिल रही चार घंटे बिजली, सूख रहीं फसलें
दूषित पेयजल पर उठाए सवाल, टीडीएस बताने में विभागीय अधिकारी नहीं दे सके जवाब
बिजली मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, निर्बाध बिजली व स्वच्छ पेयजल की उपलब्ध कराने की मांग
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संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। मंडी डबवाली के ग्रामीण क्षेत्रों में अघोषित बिजली कटौती व दूषित पेयजल आपूर्ति से ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को रोष स्वरूप ग्रामीणों ने गांव चौटाला में प्रदर्शन किया। पंचायत घर से बिजली निगम कार्यालय तक मार्च निकाला। इसके बाद बिजली मंत्री के नाम उपमंडलीय अधिकारी रजत शर्मा को ज्ञापन सौंपा।
रोष प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता राकेश फगोड़िया ने कहा कि गांव चौटाला, आसाखेड़ा, भारुखेड़ा, तेजाखेड़ा, अबूबशहर, गंगा, कालूआना सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। बार-बार शिकायतों के बावजूद संबंधित विभाग कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा।
राकेश ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है। कृषि नलकूपों की बिजली बार-बार काटे जाने से किसानों को पूरी रात खेतों में जागकर सिंचाई का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार आठ घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करती है लेकिन हकीकत में किसानों को मुश्किल से चार घंटे ही बिजली मिल रही है।
राकेश ने कहा कि नहरी पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण खेती पूरी तरह नलकूपों पर निर्भर है। समय पर बिजली नहीं मिलने से फसलें सूख रही हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने मांग है कि गांवों और कृषि नलकूपों पर बिना किसी अघोषित कटौती के निर्धारित समयानुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही बिजली व्यवस्था में सुधार कर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
प्रदर्शन में अश्विन सहारण, पालाराम सहारण, कृष्ण कुमार, बलवंत मंडा, मनफूल काली राणा, अमन बिश्नोई, राजेश सहारण, धर्मपाल जाखड़, उषा देवी, कलावती, अनीता, राजविंदर कौर आदि मौजूद रहीं।
दूषित पानी से बीमार हो रहे हैं बच्चे व बुजुर्ग
प्रदर्शन के दौरान चौटाला गांव में दूषित पेयजल आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ज्ञापन में कहा गया कि गांव में पेयजल के नाम पर नलकूपों के पानी की आपूर्ति की जा रही है। यह पीने योग्य नहीं है। दूषित पानी के कारण बच्चे, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण बीमार हो रहे हैं। वे अस्पतालों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं। इसके बावजूद जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग समस्या के समाधान के लिए गंभीरता नहीं दिखा रहा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि बिजली और पेयजल की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्रभर में आंदोलन का विस्तार किया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
ग्रामीणों ने अधिकारी से पूछे कई सवाल
ग्रामीणों ने जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता से पेयजल की गुणवत्ता पर कई सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि ग्रामीणों को उपलब्ध कराए जा रहे पानी का टीडीएस कितना है, क्या विभाग इस पानी को पीने योग्य मानता है और क्या यही पानी अधिकारी स्वयं पी सकते हैं। इन सवालों पर विभागीय अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कनिष्ठ अभियंता सन्नी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि भविष्य में स्वच्छ नहरी पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ग्रामीण बोले- पेयजल शुल्क जमा नहीं करवाएंगे
किसान नेता फगोड़िया ने कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि विभाग जल्द ही नहरी पेयजल की व्यवस्था नहीं करता तो ग्रामीण दूषित पानी के बदले कोई पेयजल शुल्क जमा नहीं करवाएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शन में महिलाएं भी हुई शामिल