सिरसा। प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय दो दिवसीय दौरे के दौरान शनिवार को सिरसा पहुंचे। उन्होंने सीडीएलयू में प्रदेश के पहले सेंसस डाटा रिसर्च वर्क स्टेशन, यूनिवर्सिटी साइंस इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर के अलावा यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर कॉम्पिटिटिव एग्जामिनेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही शैक्षणिक सत्र 2023-24 के दाखिलों से संबंधित हैंडबुक ऑफ इंफॉर्मेशन का विमोचन किया।
टैगोर भवन एक्सटेंशन लेक्चर थियेटर में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के पहुंचने पर कुलपति प्रो. अजमेर सिंह मलिक ने स्वागत किया। राज्यपाल ने पूर्व उप प्रधानमंत्री चौ. देवीलाल की आदमकद प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने विश्वविद्यालय की फैकल्टी को इनोवेटिव शैक्षणिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में जितना अधिक गुणवत्तापरक शोध कार्य होगा उतना ही राष्ट्र का विकास सुनिश्चित होगा। उन्होंने प्राध्यापकों को तकनीक और विशेष तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स पर आधारित शिक्षा तकनीक अपनाने की सलाह दी। राज्यपाल ने कहा कि देश में तीन करोड़ से अधिक नौकरियां स्किल्ड प्रोफेशनल्स की कमी की वजह से रिक्त पड़ी हैं। इस गैप को पूरा करने की जिम्मेदारी शैक्षणिक संस्थानों की है। युवाओं को व्यावहारिक रूप से दक्ष करके उन्हें न केवल रोजगार हासिल करने के काबिल बनाया जा सकता है बल्कि उनका सर्वांगीण विकास भी सुनिश्चित किया जा सकता है। इस मौके पर जिला उपायुक्त पार्थ गुप्ता, कुलसचिव डॉ राजेश बांसल, प्रो. सुरेश गहलावत, जिला पुलिस अधीक्षक उदय सिंह मीना उपस्थित थे।
अन्य भाषाओं के साथ मातृभाषा पर होनी चाहिए मजबूत पकड़
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करते हुए चरणबद्ध तरीके से कार्य करना होगा, ताकि राज्य सरकार का 2025 तक नई शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से लागू करने का विजन पूरा हो सके। मातृभाषा से हमें सदैव जुड़कर रहना चाहिए। अन्य भाषाओं के साथ-साथ मातृभाषा पर भी हमारी मजबूत पकड़ होनी चाहिए।
मात्र डिग्री से कुछ नहीं होता, युवाओं को व्यावहारिक रूप से दक्ष करना होगा
राज्यपाल ने अपने निजी अनुभव प्राध्यापकों के साथ साझा किए। उन्होंने कहा कि नवाचार को बढ़ावा देकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। मात्र डिग्री प्राप्त करने से कुछ नहीं होता युवाओं को व्यावहारिक रूप से दक्ष करना होगा और अधिगम एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, इसलिए विद्यार्थियों को निरंतर पढ़ने के लिए उत्साहित करना प्राध्यापकों को नैतिक जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने अपने भौतिकी के शिक्षक श्री रामाया का उदाहरण भी प्राध्यापकों के साथ साझा किया और कहा कि जो विद्यार्थी या शिक्षाविद अपने प्राध्यापकों का सम्मान करता है उसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता मिलती है।
स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शुरू करें एजुकेशन प्रोग्राम
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत की नामी हस्तियां शैक्षणिक संस्थाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करती हैं, लेकिन आर्थिक सहायता लेने से पूर्व शैक्षणिक संस्थानों को समाज हित, राष्ट्र हित के साथ-साथ औद्योगिक जगत की मांग के अनुरूप प्रपोजल तैयार करना होता। उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हॉस्पिटैलिटी आदि जैसे एजुकेशन प्रोग्राम प्रारंभ किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को उद्यमी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि आप अच्छा कार्य करेंगे तो वह संस्थान व राष्ट्र के हित में होगा। उन्होंने धन, शिक्षा व यश को जीवन की अमूल्य धरोहर बताया। इन सभी को अर्जित करने में मेहनत करनी पड़ती है तथा साथ की साथ समय भी लगता है।