स्टेडियम पहुंचने के लिए खिलाड़ियों को एक तरफ 50 से 70 रुपये करने पड़े खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। प्रदेश की लड़कियों को खेलों में आगे बढ़ाने के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर जिले में चल रही 59वीं लड़कियों की स्कूल राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिता में साफ दिखाई दिया। प्रदेशभर से प्रतियोगिता में पहुंचीं खिलाड़ियों के लिए खेल मैदान तो तैयार कर दिए गए लेकिन बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था में विभाग की तैयारियां कमजोर नजर आईं।
खिलाड़ियों के लिए बनाए गए चेंजिंग रूम बंद मिले तो शौचालय को ही कपड़े बदलने के लिए इस्तेमाल करना पड़ा। खेल स्थल तक पहुंचने के लिए भी खिलाड़ियों को अपनी जेब से किराया खर्च करना पड़ा।
शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में बास्केटबाल और जीवन नगर हॉकी स्टेडियम में मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं। बास्केटबाल प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ियों को खेल के दौरान कपड़े बदलने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाया। खिलाड़ियों के अनुसार चेंजिंग रूम बंद होने के कारण कई खिलाड़ियों को शौचालय में कपड़े बदलने पड़े।
प्रदेशस्तरीय प्रतियोगिता में खिलाड़ियों के लिए इस तरह की व्यवस्था सवाल खड़े करती है। खेलों में हिस्सा लेने आईं किशोरियों के लिए अलग और सुरक्षित चेंजिंग सुविधा होना जरूरी है लेकिन प्रतियोगिता स्थल पर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से उपलब्ध नहीं मिली। दूसरी बड़ी परेशानी खेल स्थलों तक पहुंचने की रही।
बाहर से आईं टीमों के खिलाड़ियों को ठहरने के स्थान से प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचने के लिए स्थानीय साधनों का सहारा लेना पड़ा। खिलाड़ियों के अनुसार एक तरफ आने-जाने में 50 से 70 रुपये तक किराया खर्च हो रहा है। यानी रोजाना आने-जाने पर एक खिलाड़ी को करीब 100 से 140 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
झज्जर से आईं खिलाड़ियों का कहना है कि प्रतियोगिता के लिए बुलाने से पहले विभाग को उनके आवागमन की व्यवस्था करनी चाहिए थी। टीमों के साथ आने वाले प्रशिक्षकों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी और खर्च का दबाव पड़ा।
विभाग ने परिवहन व्यवस्था से झाड़ा पल्ला
खिलाड़ियों के आने-जाने की समस्या पर जब टीमों और प्रशिक्षकों ने व्यवस्था की उम्मीद की तो उन्हें अपने स्तर पर खेल स्थल तक पहुंचने को कहा गया। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली खिलाड़ी खेल पर ध्यान दें या रोजाना स्टेडियम तक पहुंचने की व्यवस्था पर यह सवाल आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी उठ रहा है। वहीं, नोडल अधिकारी हरबंस ने कहा कि खिलाड़ियों को रुकने के स्थान से स्टेडियम तक लेकर आने की जिम्मेदारी मेजबान की नहीं होती। इसके लिए उनका जिला टीए अलाउंस देता है। इसकी जिम्मेदारी उनके साथ आए कोच की है।
गर्मी में पंखे के नीचे कटी रात
गर्मी के मौसम में बाहर से आईं खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था भी चर्चा में रही। एक खिलाड़ी ने बताया कि रात में गर्मी से राहत के लिए पंखे के नीचे ही रात गुजारनी पड़ी। खिलाड़ियों का कहना है कि दिनभर मैदान में पसीना बहाने के बाद रात में आराम के लिए बेहतर व्यवस्था की उम्मीद थी लेकिन गर्मी के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी।
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कपड़े बदलने के लिए शौचालय का सहारा लेना पड़ा : पूजा
झज्जर से आईं खिलाड़ी पूजा ने बताया कि हम प्रतियोगिता में खेलने के लिए इतनी दूर से आए हैं। मैदान में मुकाबले के बाद कपड़े बदलने की जरूरत होती है लेकिन चेंजिंग रूम बंद था। ऐसे में हमें शौचालय में जाकर कपड़े बदलने पड़े। लड़कियों की प्रतियोगिता में सबसे पहले सुरक्षित और अलग चेंजिंग रूम की व्यवस्था होनी चाहिए। हमें उम्मीद थी कि राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में व्यवस्थाएं बेहतर होंगी लेकिन यहां ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा।
खेलने आए हैं, रोज का किराया भी देना पड़ रहा : कोमल
कोमल ने बताया कि हमारा पूरा ध्यान मुकाबले पर होना चाहिए लेकिन स्टेडियम आने-जाने के लिए किराया खर्च करना पड़ रहा है। एक तरफ करीब 50 से 70 रुपये लग जाते हैं। दिन में दो बार आने-जाने पर खर्च और बढ़ जाता है। अगर टीमों के लिए आने-जाने की व्यवस्था होती तो खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों दोनों को सुविधा रहती। गर्मी में रात को भी पंखे के नीचे रहना पड़ा। प्रतियोगिता में खेलने का उत्साह है लेकिन सुविधाएं मिलें तो परेशानी कम हो।
किसी ने पूछा नहीं चेंजिंग रूम का, परिवहन का टीम का खुद का होता है : हरबंस
जिलास्तरीय प्रतियोगिता के नोडल अधिकारी हरबंस ने बताया कि उन्हें ऐसी किसी समस्या की जानकारी नहीं है और न ही किसी कोच यहां खिलाड़ी ने उनसे चेंजिंग रूम की डिमांड की। आज हम चेंजिंग रूम खुलवा देंगे। वह परिवहन की व्यवस्था के लिए बजट नहीं होता है। यह टीम को उसका जिला देता है। हां कई स्कूलों में कूलर की व्यवस्था नहीं विभाग व्यवस्था बनाने में लगा हुआ है।