सर, हम बसों में लेडिज कंडक्टर नहीं रख सकते। न ही बसों में सीसीटीवी कैमरे लगा सकते हैं। हमें नए शैक्षणिक सत्र तक का समय दिया जाए। यह कहते हुए निजी स्कूलों ने एसडीएम के जरिये सरकार तक समय मांगा है।
मंगलवार को खंड डबवाली तथा औढ़ां के निजी स्कूलों की एक बैठक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हुई। अध्यक्षता एसडीएम अजय कुमार ने की। एसडीएम ने जैसे ही निजी स्कूल संचालकों को सरकार के निर्देशानुसार सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा तो संचालक विरोध दर्ज करवाते नजर आए।
स्कूल संचालक रमेश सचदेवा, सत्यप्रकाश यादव ने कहा कि मेट्रो सिटी की तर्ज पर शिक्षा में पिछड़े डबवाली क्षेत्र में क्या बस की कंडक्टर महिला नहीं हो सकती। क्या सरकार जिम्मेवारी तय करेगी कि उस महिला के साथ कोई गलत कार्य नहीं हो सकता। डबवाली में महिला कंडक्टर की योजना सिरे चढ़ पाना मुश्किल है। चूंकि महिला कंडक्टर का प्रचलन नहीं है। स्कूल संचालकों ने कहा कि यह भी मुमकिन नहीं कि तुरंत ही बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। एक बस में कैमरे लगाने पर करीब 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आएगा।
इस शैक्षणिक सत्र में यह संभव नहीं। चूंकि बच्चों पर आर्थिक बोझ नहीं डाला जा सकता। न ही अभिभावक इसे स्वीकार करेंगे। स्कूल संचालकों ने कहा कि कुछ समय पहले सरकार ने स्कूली बसों में स्पीड गवर्नर लगाए थे। सरकार सीसीटीवी कैमरे लगाने का दबाव बना रही है। कैमरों की पासिंग होगी। अगर एक निश्चित दुकान से कंट्रैक्ट करके कैमरे नहीं लगाए गए तो रिजेक्ट हो जाएंगे। निजी स्कूल संचालकों ने सरकार से कैमरों के बारे में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार बताए कि वे किस तरह के कैमरे लगा सकते हैं। मार्केट में चाइनिज कैमरे दो-ढाई हजार में उपलब्ध हैं। एक बस पर करीब पांच हजार रुपये का खर्च आएगा। इस मौके पर बीईओ बलजिंद्र सिंह भंगू, बीईईओ नरेश सिंगला भी मौजूद रहे।
निजी स्कूलों ने कैमरे लगाने के लिए कुछ समय मांगा है। अपनी समस्याएं भी बताई हैं। यह मांग उपमंडलाधीश के जरिए सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
-नरेश सिंगला, बीईईओ, डबवाली