संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नवरात्र को लेकर शहर के सभी मंदिरों ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिले के सभी 400 मंदिरों में नवरात्र पर्व मनाया जाएगा। शहर के श्री सालासर धाम मंदिर में पहले नवरात्र पर 351 ज्योत प्रज्वलित की जाएगी। ये ज्योत दशहरे तक मंदिर में अखंड जलती रहेगी।
नवरात्रा को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। इस बार सोमवार से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। मंदिरों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना के लिए विशेष तैयारी की गई है। सोमवार सुबह आठ बजे सभी मंदिरों में मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। इस दौरान मंदिरों और घरों में घट स्थापना की जाएगी। सालासर मंदिर में इस बार रंगोली के माध्यम से ग्रहों को भी बनाया जा रहा है। मां के नौ रूपों को स्नान करवाकर नए वस्त्र भी पहना दिया गए हैं। मंदिर को लड़ियों के माध्यम से सजाया गया है। वहीं, देखा जाए तो इस बार अक्तूबर में एक साथ पांच पर्व का संयोग बन रहा है, लेकिन विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा।
5 रुपये से एक हजार रुपये तक की चुनरी
बाजार में दुकानों पर पूजा से संबंधित मां की चुनरी, ध्वजा तथा अन्य 16 शृंगार की वस्तुएं उपलब्ध हैं। दुकानदार दीपक कुमार ने बताया कि माता की चुनरी की कीमत पांच रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक है। ध्वजा 20 रुपये से 100 रुपये तक उपलब्ध है। इसके अलावा शृंगार की वस्तु भी 20 रुपये से शुरू होती है, जो अधिकतम 100 रुपये तक बाजार में मिल रही है।
शहर के इन मंदिरों में नवरात्र की पूजा
शहर के सालासर धाम मंदिर, गीता भवन मंदिर, खैरपूर के मां काली मंदिर, भादरा बाजार स्थित सती माता मंदिर, रानियां रोड स्थित हनुमान मंदिर, नोहरिया बाजार में गणेश मंदिर, पुलिस लाइन स्थित माधव मंदिर, हाउंसिंग बोर्ड कॉलोनी में कृष्ण मंदिर, चत्तरगढ़पट्टी स्थित पंचमुखी मंदिर, अनाज मंडी स्थित मां दुर्गा दरबार, मावड़ी मंदिर में नवरात्र का पर्व मनाया जाएगा।
मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की जाती है पूजा
- प्रथम दिन- मां शैलपुत्री
- दूसरा दिन- ब्रह्मचारिणी
- तीसरा दिन- चंद्रघंटा
- चौथा दिन- कुष्मांडा
- पांचवा दिन- स्कंदमाता
- छठा दिन - कात्यायनी
- सातवां दिन - कालरात्रि
- आठवां दिन- महागौरी
- नौवां दिन- सिद्धिदात्री
विश्वास अडिग होना चाहिए, तभी फल मिलता है
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की संतान है। शैल अर्थात अडिग। माना जाता है कि मां दुर्गा से संपर्क साधने के लिए जातक का विश्वास भी अडिग होना चाहिए, तभी भक्ति का फल मिलता है। मां शैलपुत्री सभी पशु-पक्षियों, जीव की रक्षक मानी जाती है। मां शैलपुत्री श्वेत वस्त्र धारण कर वृषभ की सवारी करती हैं। पहले दिन सभी श्रद्धालु मां के इसी स्वरूप की पूजा अर्चना करते हैं।
इस बार 30 सितंबर से लेकर 25 नवंबर तक शुक्र अस्त होने के चलते मांगलिक विवाह कार्य का संयोग नहीं बन रहा है। 26 नवंबर से लेकर 14 दिसंबर तक विवाह कार्य का आयोजन शुभ माना जा रहा है। -पंडित हरिद्वारी शर्मा।
शहर के सालासर धाम मंदिर में ग्रहों की रंगोली बनाते पंडित। संवाद- फोटो : Sirsa