प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने जिले के गांव माधोसिंघाना में स्थित एक निजी फैक्टरी को नोटिस जारी किया था, जिसका जवाब अभी तक फैक्टरी संचालक द्वारा नहीं दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने फैक्टरी में करीब दस प्रकार की खामियां नोटिस में डाली थी।
गांव माधोसिंघाना में स्थित एमडी एग्रोटेक का प्रदूषण विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार श्योराण ने अपनी टीम के साथ बीती 23 दिसंबर को औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने फैक्टरी द्वारा पर्यावरण प्रदूषण किया जाना पाया। टीम ने पाया कि हवा प्रदूषण को रोकने के लिए लगाई गए मल्टीसाइकलोन तथा वेट स्क्रबर पूर्ण रूप से नहीं लगाए हुए हैं। जांच करते समय टीम ने देखा कि वहां पर लगाया गया वेट स्क्रबर लीक हो रहा है। टीम ने पाया कि फैक्टरी में वेट स्क्रबर निकलने के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। जांच के दौरान फैक्टरी की लॉगबुक तथा एपीसीडी में कोई डाटा नहीं डाला गया था। टीम ने देखा कि फैक्टरी में ट्यूबवेल के पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है तथा वहीं फैक्टरी कर्मचारियों के पास पानी के प्रयोग का भी कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। टीम ने पाया कि फैक्टरी में बिजली के लिए लगाये गए जनरेटर की ऊंचाई भी कम है तथा साइलेंसर भी कम ऊंचाई के साथ दीवार से लगा हुआ है। टीम ने नोटिस के दौरान बताया कि फैक्टरी में प्लास्टिक का गोदाम पाया गया। टीम ने मौके पर पाया कि फैक्टरी से ट्रांसपोर्ट हो रहे माल के कारण पूरी सड़क पर मिट्टी बिखरी रहती है, जिस कारण आने जाने वालों के लिए परेशानी बनती है। वहीं टीम ने मौके पर देखा कि काम करने वाले कर्मचारियों ने कोई भी सुरक्षा उपकरण नहीं डाला हुआ है, जिससे एक बड़ा हादसा हो सकता है। टीम ने निरीक्षण कर फैक्टरी को एक नोटिस जारी किया कि वह इस पर अपना जवाब दें, लेकिन अभी तक फैक्टरी की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। वहीं नोटिस में बताया गया है कि अगर फैक्टरी संचालक ने नोटिस मिलने के सात दिन में जवाब नहीं भेजा तो विभाग द्वारा फैक्टरी को सील कर दिया जाएगा।
अभी तक उनके पास कोई जवाब नहीं आया है। फैक्टरी संचालक के पास नोटिस पहुंचने के बाद सात दिन का समय होता है, अगर सात दिन में कोई जवाब नहीं आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सुनील कुमार श्योराण, वैज्ञानिक, प्रदूषण विभाग।