संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शहर में पार्क संस्थाओं को देकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। खासतौर पर भादरा पार्क और जीवन पार्क के हालात खुद अपनी बदहाली की कहानी सुनाते हैं। हालांकि, पार्कों की शिकायतें मिलने के बाद जिला नगर आयुक्त ने भुगतान जारी करने पर रोक लगा दी है।
इन पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी संस्था को गोद देकर तय की गई है लेकिन जमीनी हकीकत तस्वीरों के जरिए कुछ और ही बयान करती है।इन पार्कों का भुगतान तभी संस्थाओं को जारी किया जाएगा जब जेई एक-एक पार्क का मौका निरीक्षण करेंगे। वे पार्कों का फोटो व वीडियो बनाकर अपने पास रिकॉर्ड रखेंगे। उसके बाद ही पार्काें के भुगतान जारी करने पर प्रशासन विचार करेगा। अहम बात यह है भादरा पार्क गोद देकर सवा लाख रुपये से ज्यादा की भुगतान किया जाता है लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं है। लोगों की मानें तो नगर परिषद के कर्मचारी ही पार्क की सफाई करते हैं। ऐसे में संस्था को लाखों रुपये क्यों दिए जा रहे हैं।
विधायक तक लाइव आकर दिखा चुके हैं हालात : विधायक गोकुल सेतिया भी मुख्यमंत्री दौरे से पहले एक एक पार्क में जाकर उनके हालात लाइव दिखा चुके हैं। इन पार्कों को लेकर कोई बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। शहर के मुख्य एंट्री पॉइंट पर बने इन पार्कों की सुध लेने की दिशा में कोई काम नहीं किया गया है।
नगर परिषद और संस्था के दावों की खुली पोल : हरियाली के नाम पर विकसित किए गए इन पार्कों की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने नगर परिषद और पार्कों को गोद लेने वाली संस्था दोनों के दावों की पोल खोल दी। कहीं घास पूरी तरह गायब मिली तो कहीं पार्क जंगल का रूप लेते नजर आए। कई स्थानों पर खरपतवार और झाड़ियां इतनी अधिक उग चुकी हैं कि लोगों का वहां तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। पार्कों में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले और अन्य उपकरण टूटे पड़े हैं। लोहे की ग्रिल और सजावटी ढांचे जर्जर अवस्था में हैं। कुछ स्थानों पर लोहे के ढांचे केवल नाम मात्र के लिए खड़े दिखाई दिए। ये हादसे के सबब बने हुए हैं।
दीवारों पर स्वच्छता संदेश, नीचे पसरी गंदगी : ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पार्क परिसर में जगह-जगह कूड़े के ढेर, निर्माण मलबा और प्लास्टिक कचरा भी फैला मिला। विडंबना यह रही कि जहां एक ओर दीवारों पर स्वच्छता के संदेश लिखे गए हैं वहीं उन्हीं संदेशों के नीचे गंदगी का अंबार लगा हुआ है। इससे साफ है कि स्वच्छता अभियान केवल नारों तक सीमित होकर रह गया है। अब सवाल यह है कि पार्कों को गोद लेने वाली संस्था और संबंधित विभाग आखिर इन बदहाल पार्कों की सुध कब लेंगे या फिर शहर के ये पार्क केवल कागज में ही ग्रीन पार्क बने रहेंगे।