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एचटेट में फेल, चौधर की परीक्षा में पास

Sat, 16 Jan 2016 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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टीचर बनने के लिए खूब पढ़ा। नौकरी के लिए आवेदन भी किए। हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा में भी निराशा हाथ लगी। एग्रीकल्चर में डिप्लोमा करने की सोच ही रहा था कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में सरकार ने शैक्षणिक योग्यता का केस जीत लिया।
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गांव की चौधर का इम्तिहान देने की ठानी और नामांकन भर दिया और पास हो गया। जीत के बाद अपने पहले वादे पर खरा उतरने का प्रयास करते हुए स्वच्छता अभियान चला रहा है।

खंड डबवाली के गांव बिज्जूवाली के नवनिर्वाचित सरपंच अनिल कुमार की। 30 वर्षीय यह युवक टीचर बनना चाहता था। केयूके से हिंदी में एमए और जेबीटी की। एमए करने के बाद कई जगह आवेदन भी किया, लेकिन नौकरी नहीं मिली। पिता राजकुमार सरपंच बनना चाहते थे।
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वर्ष 2005 में चुनाव भी लड़ा था, लेकिन निराशा हाथ लगी। वर्ष 2009 में सरपंच पद आरक्षित हो गया। ऐसे में सरपंच बनने की इच्छा दबी रह गई।

इस बार सरकार ने शैक्षणिक योग्यता लागू करके राजकुमार के रास्ते में बाधा उत्पन्न कर दी। सरकार के अनुसार सरपंच के लिए दसवीं पास होना चाहिए था, लेकिन राजकुमार आठवीं पास थे। ऐसे में इम्तिहान की घड़ी अनिल कुमार की थी। एमए, जेबीटी पास युवक ने चौधर की परीक्षा देने के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। कुल 1419 वोट में 914 वोट प्राप्त करके पहले स्थान पर रहा। 433 वोटों से जीत हासिल हुई।

पुरुषों में सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा
खंड डबवाली के 25 गांवों के पुरुष सरपंचों में अनिल कुमार सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा है। यहीं नहीं अपने वादे के अनुसार वह शपथग्रहण से पूर्व ही गांव में स्वच्छता अभियान शुरू करने जा रहा है। रविवार को गांव बिज्जूवाली की रघुनाथ मंदिर सेवा समिति के सहयोग से गांव में अभियान चलेगा।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी गांव का सरपंच बनूंगा। टीचर बनने के लिए पढ़ाई की थी। अब गांव के विकास में पूरा योगदान दूंगा। मेरा प्रयास रहेगा कि गांव में कोई निरक्षर न रहे। -अनिल कुमार, नवनिर्वाचित सरपंच
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