जिला प्रशासन की ओर से संवेदनशील गांव की श्रेणी में शामिल किए गए गांव खेड़ी ने नई मिशाल कायम की है। इस बार गांव ने सर्वसम्मति से दलित समुदाय के व्यक्ति को सरपंच चुना है। गांव की इस उपलब्धि की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
दरअसल इस बार गांव की सरपंची अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और गांव में अनुसूचित बिरादरी से ही कोई सरपंच चुना जाना था।
इसको लेकर पिछले एक सप्ताह से गांव में बैठकें आयोजित हो रही थीं, जिसे वीरवार को मूर्त रूप देेते हुए गांव के बलबीर सिंह पर पूरे गांव ने सहमति जता दी।
गौरतलब है कि पिछली बार के पंचायती चुनाव में यहां काफी ज्यादा विवाद हुआ था और स्थिति ये हो गई थी कि गांव के कई वार्डों के चुनाव भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दोबारा करवाने पड़े थे। वहीं अभी भी गांव की पूरी पंचायत सर्वसम्मति से बनाए जाने के लिए गांव में बैठकों का दौर जारी है।
गांव में खुशी का माहौल
खेड़ी गांव में पिछले पंचायत चुनाव में पूरा गांव दो धड़ों में बंट गया था और गांव में काफी मनमुटाव हो गया था। चुनाव के दिन वोटिंग के दौरान बूथ पर झगड़ा हो गया था।
ईवीएम के साथ तोड़फोड़ कर दी थी, लेकिन इस बार गांव में सर्वसम्मति बनने पर जहां पूरे क्षेत्र में गांव के इस फैसले की सराहना हो रही है, वहीं गांव के लोग आपसी भाईचारे को कायम रखने के लिए इस फैसले की एक-दूसरे को बधाई दे रहे हैं।
सर्वसम्मति से सरपंच चुने जाने पर गांव में खुशी का माहौल बना हुआ है। इस फैसले से पूर्व गांव में हुई बैठकों में ग्रामीणों का मनमुटाव भी दूर हो गया।
कमेटी ने ये भी लिए फैसले
सरपंच पद के लिए सर्वसम्मति बनाते समय गांव में आयोजित बैठक में कई फैसले लिए गए, जिनका उद्देश्य गांव में आपसी भाईचारा कायम रखने के साथ गांव का समग्र विकास हो सके।
फैसला लिया गया कि पंचायती चुनाव में ना तो पैसे का लेन-देन होने देंगे और ना ही शराब का। यह भी फैसला लिया गया कि आगामी पांच वर्ष तक गांव में विकास कार्य करवाने के लिए दस सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई है, जो निर्विरोध चुने गए सरपंच के साथ गांव के विकास कार्य करवाएंगे। इसके अलावा गांव के छोटे-मोटे झगड़ों का निपटान भी यह कमेटी अपने स्तर पर करेगी।