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खारकीव मेट्रो स्टेशन खाली करने के आदेश, बच्चों से टूटा संपर्क तो उपायुक्त कार्यालय पहुंचे अभिभावक

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लघु सचिवालय में प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने पहुंचे यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के परिजन। - फोटो : Sirsa
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सिरसा। रूस की सीमा के साथ सटे यूक्रेन के खारकीव शहर को रूसी सैनिकों की ओर से निशाना बनाया जा रहा है। इसी शहर में काफी संख्या में भारतीय नागरिक रह रहे हैं। यूक्रेन सरकार की ओर से अब सभी नागरिकों को खारकीव शहर छोड़ने के आदेश दिए गए हैं। जिसके बाद से खारकीव में फंसे सिरसा के नागरिकों का अपने अभिभावकों से संपर्क टूट चुका है। संपर्क न हो पाने के कारण अभिभावक एकत्र होकर उपायुक्त से मिलने के लिए पहुंचे और उन्हें स्थिति के बारे में जानकारी दी। उपायुुक्त अजय सिंह तोमर एंबेसी के अधिकारियों से बातचीत कर जल्द ही उन्हें स्वदेश लाने का आश्वासन दिया है।
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बुधवार देर शाम को उपायुक्त कार्यालय में पहुंचे आठ बच्चों के अभिभावकों ने बताया कि उनके बच्चे खारकीव शहर में फंसे हुए हैं। पहले एंबेसी की ओर से उन्हें हॉस्टल के बेसमेंट व अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन पर रखा गया था और उन्हें वहीं पर रहने की जानकारी दी थी। लेकिन शाम को एंबेसी और यूक्रेन सरकार की ओर से खारकीव को खाली करने के आदेश दिए गए हैं। जिसके बाद उन्हें वहां से निकालकर 11 किलोमीटर दूरी स्थित गांवों में भेजा जा रहा है। अब उनका अपने बच्चों के साथ संपर्क भी टूट चुका है। किसी से भी बात नहीं हो पा रही। जिसके कारण उनकी चिंता पहले से अधिक बढ़ चुकी है। वहीं उन्होंने सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि जल्द से जल्द उनके बच्चों को वहां से निकाला जाए।
परिजन बोले : रूस सरकार से बातचीत कर बॉर्डर से लाया जा सकता है वापस
वहीं अभिभावक राजेश अरोड़ा ने बताया कि रूस बॉर्डर से 35 किलोमीटर दूर ही यूक्रेन का खारकीव शहर बसा है। जिसके कारण रूस की सेना भी वहां पर अधिक नुकसान पहुंचा रही है। वहीं उन्होंने कहा कि अगर भारत सरकार की ओर से रूस सरकार से बातचीत कर रूस के बॉर्डर को खोला जाए तो वहां पर फंसे भारतीय नागरिकों को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। वहां पर बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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परिजन बोले स्थिति खराब, 11 किलोमीटर दूर है गांव
परिजनों ने बताया कि यूक्रेन सरकार की ओर से नागरिकों को जिन गांवों में भेजा जा रहा है वह गांव भी 11 किलोमीटर दूर है जबकि उनको लाने के लिए कोई बस या अन्य सुविधा नहीं हैै। संपर्क न हो पाने के कारण उनकी स्थिति की कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। उनके आसपास के क्षेत्र में मिसाइल और बमबारी हो रही थी। जिससे बच्चे भी काफी घबराए हुए थे। सरकार की ओर से जल्द से जल्द बच्चों को वापस निकाला जाए।
रोमानिया, पोलैंड और हंगरी में पहुंचे है कई विद्यार्थी
जिले के अभी भी 30 से अधिक छात्र यूक्रेन से निकलकर रोमानिया, पोलैंड और हंगरी देश में पहुंच चुके है जबकि कई विद्यार्थी अभी यूक्रेन के देशों में फंसे हुए हैं। विद्यार्थियों का कहना है स्थिति हर रोज काफी खराब होती जा रही है। जैसे तैसे कर वह भारत में लौटना चाहते हैैं। यूक्रेन से नागरिक निकलकर रोमानिया, पोलैंड और हंगरी देश के बॉर्डरों में पहुंच रहे है। भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बॉर्डर पर भीड़ अधिक होने के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं यूक्रेन से निकलकर पोलैंड देश में पहुंचे छात्र शुभम कंबोज ने बताया कि पोलैंड देश की ओर से अब यूक्रेन से आने वालों के लिए एक और बार्डर खोला गया है। जिसके बाद अब नागरिकों को आसानी हो रही है।
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