सिरसा। ग्रामीण विकास के मामले में प्रशासन व पंचायत के बीच रीढ़ की हड्डी का काम करने वाले ग्राम सचिवों का सिरसा जिले में भारी टोटा पड़ा हुआ है। एक ओर सरकार जहां ई-टेंडरिंग पर जोर दे रही है, वहीं जिले का पंचायती राज महकमा लगभग खाली पड़ा है। जिले में गांवों के हिसाब से हर दो गांव में एक ग्राम सचिव चाहिए, लेकिन यहां पर हर पांच गांवों पर एक ग्राम सचिव है। इस कारण गांवों में विकास के जो काम होने चाहिए, वह धीमी रफ्तार से चल रहे हैं।
सिरसा में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी का एक पद पाली पड़ा है। जिले के 339 गांवों में 66 ग्राम सचिव हैं। सरकार इस समय गांवों में ई-टेंडरिंग से काम करवाने पर पूरा जोर दे रही है, लेकिन ई-टेंडरिंग या गांवों में होने वाले विकास की भूमिका निभाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों का पंचायती राज विभाग में टोटा पड़ा है। सरकार की ओर से सिरसा में ग्राम सचिवों के 124 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इस समय जिले में सिर्फ 66 ग्राम सचिव ही कार्य कर रहे हैं।
हर दो गांवों पर होना चाहिए एक ग्राम सचिव
पंचायती राज संस्थाओं के विकास कार्यों का लेखाजोखा रखने वाले ग्राम सचिवों की बात करें तो सिरसा में हर दो गांवों पर एक ग्राम सचिव की आवश्यकता है, लेकिन यहां पर हर पांच गांवों पर एक ग्राम सचिव है। इनमें कई ग्राम सचिव को विभागीय कार्य भी देख रहे हैं, जिसका अतिरिक्त अन्य ग्राम सचिवों पर पड़ रहा है।
मनरेगा से लेकर अन्य कामों में हो रही परेशानी
गांवों में किसी भी विकास कार्य के टेंडर और मनरेगा के काम के लिए ग्राम सचिवों का होना अति आवश्यक है। ऐसे में ग्राम सचिवों के पास अलग-अलग गांवों का कार्यभार होने के कारण समय पर टेंडर नहीं हो पा रहे हैं। कई गांवों में तो मनरेगा का काम भी शुरू नहीं हो सका है। यही नहीं गांवों में सड़कों के निर्माण आदि के काम भी रुके हुए हैं। इसके अलावा विकास कार्यों की मॉनिटरिंग में भी दिक्कत आ रही।
वर्जन
पंचायती राज में ग्राम सचिवों व अधिकारियों की कमी है। ग्राम सचिवों की मांग के लिए सरकार के पास समय-समय पर रिमाइंडर भेजा जा रहा है। उम्मीद है कि ग्राम सचिवों व अधिकारियों की कमी पूरी हो जाएगी। -राजेश कुमार, डीडीपीओ, सिरसा