वर्ष 2019 में शुरू हुआ था वन स्टॉप सेंटर, काउंसिलिंग से सुलझे अधिकतर मामले
181 पर कॉल करती हैं महिलाएं, एसिड अटैक पीड़िता को दिलाई साढ़े 7 लाख रुपये की सहायता
फोटो एक
सिरसा
सिरसा। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से संचालित वन स्टॉप सेंटर सखी उत्पीड़न की शिकार महिलाओं का सहारा बन रहा है। यह सेंटर 8 मार्च 2019 को शुरू हुआ था। अब तक 1830 महिलाओं को इस सेंटर के माध्यम से न्याय और सहायता मिली है।
अधिकांश मामलों का समाधान काउंसिलिंग के जरिये किया गया है। सखी सेंटर हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को एक ही स्थान पर सुविधाएं देता है। इसमें अस्थायी आश्रय, पुलिस-डेस्क, विधि सहायता, चिकित्सा और काउंसिलिंग शामिल हैं।
सेंटर घरेलू हिंसा, एसिड पीड़ित, गुमशुदा, दहेज और दुष्कर्म जैसे मामलों में मदद करता है। घरेलू हिंसा से प्रभावित 800 से अधिक महिलाएं सेंटर से सहायता ले चुकी हैं। वन स्टॉप सेंटर इंचार्ज मंजू रानी ने बताया कि अधिकतर शिकायतों का समाधान काउंसिलिंग से हुआ।
उत्पीड़न की शिकार 500 महिलाओं को सेंटर में आश्रय सुविधा का लाभ मिला है। महिलाओं को आश्रय देने के लिए सेंटर में 2 कमरे उपलब्ध हैं। 215 मामलों में पीड़ित महिलाओं को तुरंत पुलिस सहायता भी दी गई।
महिलाएं इमरजेंसी में हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल करके मदद मांग सकती हैं। सरकार ने उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए यह सेंटर खोला है।
नशे से छुटकारा और आर्थिक सहायता
हेल्पलाइन 181 पर एक महिला ने पति के नशे और झगड़े की शिकायत की थी। वन स्टॉप सेंटर टीम ने पति-पत्नी की काउंसिलिंग की। महिला के पति का नागरिक अस्पताल में नशा मुक्ति उपचार करवाया गया। उपचार के बाद वह व्यक्ति ठीक हो गया और दंपती सुखी जीवन जी रहे हैं। एक रिश्तेदार द्वारा एसिड अटैक की शिकार एक महिला को सेंटर ने मदद दी। पीड़िता 70 फीसदी झुलस गई थी। उसे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से साढ़े 7 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई गई।
शिकायतों के कारण और समाधान
वन स्टॉप सेंटर में आई अधिकतर शिकायतों में घरेलू हिंसा का मुख्य कारण नशा रहा है। सबसे ज्यादा शिकायतें ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त हो रही हैं। शहर में घरेलू हिंसा की स्थिति में कुछ सुधार देखा जा रहा है। हर शिकायत की पूरी तरह से जांच-पड़ताल की जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों के मामलों में सरपंच को बुलाया जाता है। शहरी क्षेत्रों के मामलों में एमसी को बुलाया जाता है। मौअजिज लोगों से बातचीत कर असल कारण जानकर काउंसिलिंग की जाती है।
आश्रय और कानूनी सहायता
वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं को अस्थायी शेल्टर में पांच दिन तक रहने की सुविधा मिलती है। इसमें खाने, कपड़े, स्वास्थ्य सुविधाएं और कानूनी सुविधा भी शामिल है। पांच दिनों के बाद महिला के केस को देखते हुए उसे नारी निकेतन या घर भेज दिया जाता है। कोर्ट में चल रहा केस बरकरार रहता है। इन मामलों के लिए महिलाओं को सरकारी वकील मुहैया करवाया जाता है।
वर्जन
उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के लिए सरकार ने वन स्टाप सेंटर खोला है। यहां महिलाओं को त्वरित सहायता सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। अब तक 1830 महिलाएं वन स्टाप सेंटर से सहायता ले चुकी हैं। कोई भी महिला इमरजेंसी में हेल्पलाइन नंबर 181 पर कॉल करके मदद मांग सकती है।
-मंजू रानी, इंचार्ज, वन स्टॉप सेंटर, सिरसा।