फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirsa News: दीपावली पर आपके घर को जगमग करेंगे गुजरात मॉडल के एक लाख दीये

Wed, 16 Oct 2024 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
विज्ञापन
ओढां में चाक पर करवे बनाता मदन लाल। संवाद
विज्ञापन
राजू
विज्ञापन

ओढां। एक वह समय था जब दीपावली पर घरों की मुंडेरों पर मिट्टी के दीयों की कतार एक अलग ही छटा बिखेरती थी। अब भले ही मिट्टी के दीयों की जगह लड़ियों ने ले ली है, लेकिन आज भी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मिट्टी के दीयों ने अपनी लौ को बरकरार रखा हुआ है। दीपावली में 15 दिन शेष हैं। ऐसे में कारीगर दीयों व अन्य मिट्टी के बर्तन बनाने में जुटे हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार उनका काम अच्छा निकलेगा।
गांव ओढां में 29 वर्षीय कुंभकार मदन अपने परिवार के साथ मिट्टी के दीये बनाने में जुटा हुआ है। इस बार उसने अपने पिता के पुराने डिजाइन को बदलकर दीयों व अन्य बर्तनों को नया लुक दिया है। इससे पहले उसका पिता अमर सिंह पुराने ढंग से ही दीये बनाता आ रहे हैं। मदन ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर दीये व अन्य बर्तनों को नया लुक दिया है। इस के बारे में उसने दीपावली पर लक्ष्मी पूजन, गणपति व रिद्धि-सिद्धि पूजन के लिए अलग-अलग ढंग से फैन्सी व आकर्षक दीये तैयार किए हैं। फैन्सी दीये मदन ने गुजरात के मॉडल को देखकर तैयार किए हैं। इन दीयों की कीमत 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक है। बर्तनों में नया डिजाइन लोगों को इस कदर भाया कि त्योहार से पूर्व ही अब तक करीब 55 हजार दीये व अन्य बर्तन बिक चुके हैं। मदन ने दीपावली को जगमग करने के लिए एक लाख फैन्सी दीयों का लक्ष्य रखा है।
विज्ञापन

मदन ने बताया कि ये उनका पुश्तैनी कार्य है, इसी से उसके परिवार की आजीविका चलती है। करीब 2 माह पूर्व ही मदन व उसके परिवार ने दीये बनाने का कार्य शुरू कर दिया था। अब तक उन्होंने करीब 45 हजार दीये, 2 हजार गुल्लक, 10 हजार छोटे कलश, 8 हजार बड़े कलश सहित अन्य मिट्टी के बर्तन बना दिए हैं। इसके अतिरिक्त मदन की भट्ठी में करीब 20 हजार दीये, 2 हजार छोटे व करीब एक हजार बड़े कलश पक रहे हैं। संवाद


करवा चौथ के लिए भी बनाया कुछ नया।
करवाचौथ में 4 दिन का समय शेष है। करवा चौथ के लिए मदन ने मिट्टी के छोटे कलश नुमा बर्तन, जिसे आम भाषा में करवा बोला जाता है, तैयार किए हैं। उसने इन करवों को फैन्सी डिजाइन के साथ नया लुक दिया है। मदन को अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है। उसने करीब 10 हजार करवे तैयार किए हैं। इनकी मांग भी बढ़ी है।





पिता बीमार हुए तो संभाला पुश्तैनी काम, सोशल मीडिया का लिया सहारा

मदन का पिता 61 वर्षीय अमर सिंह बचपन से ही ये कार्य करता आ रहे हैं। मदन उनका इकलौता पुत्र है। मदन इस कार्य में नहीं आना चाहता था। 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद मदन लाल चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर ड्राइविंग करने लगा। पिता के अस्वस्थ होने के बाद वह ड्राइविंग छोड़ अपने घर आ गया और अपना पुश्तैनी कार्य संभाल लिया। मदन ने चाक संभालते हुए सोशल मीडिया का सहारा लेकर इस कार्य में कुछ नवाचार किया। इस नए कुंभकार ने मंदे पड़े इस काम में जान डाल दी। ये देखकर अमर सिंह भी हैरान हुआ। इससे पहले अमर सिंह व उसकी पत्नी लक्ष्मी दोनों बर्तन बनाकर गांवों में फेरी पर जाते थे। अब मदन के बनाए दीये व बर्तन लेने के लिए दुकानदार व लोग स्वयं उसके घर आते हैं। मदन के मुताबिक पिछले 2-3 वर्षों से लोगों का मिट्टी के बर्तनों की तरफ रुझान फिर से बढ़ा है। मदन ने बताया कि लोग हर चीज में कुछ नया चाहते हैं, इसलिए उसने इस बार दीपावली पर अलग-अलग तरह के कई दीये तैयार किए हैं जोकि लोगों को काफी पसंद भी आ रहे हैं।
विज्ञापन





जितनी मेहनत उतने नहीं मिल पाते दाम
मदन लाल ने बताया कि इस कार्य में जितनी मेहनत है उतने दाम उन्हें नहीं मिल पाते। उनके परिवार से 4 लोग इस कार्य में मेहनत करते हैं। अगर पूरा खर्च जोड़ने पर दिहाड़ी भी मुश्किल से बचती है। उन्होंने बताया कि जो मिट्टी की ट्राली विगत वर्ष करीब 5 हजार रुपये की मिलती थी वो अब साढ़े 6 हजार रुपये में पड़ रही है। लकड़ियों के दाम भी करीब 400 रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। एक बार भट्टी पकाने पर भी 10 हजार से अधिक का खर्च आता है। उसने कहा कि इस धंधे को जीवित रखने के लिए सरकार को कुंभकार के हितार्थ योजना चलानी चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें