गरीबी से जूझ रहा गिरीश बड़ा होकर पुलिस अफसर बनना चाहता है पर उसकी बीमारी उसके आडे़ आ रही थी, दोनों किडनी खराब होने पर उसकी जिंदगी खतरे में थी।
मां किडनी देने को तैयार पर ट्रांसप्लांट के लिए पैसा नहीं था, आखिर पिता ने आर्थिक मदद की गुहार की तो पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने आपरेशन का सारा खर्च वहन किया। आपरेशन सफल रहा।
बृहस्पतिवार देर शाम को वह अस्पताल से छुट्टी लेकर सिरसा के लिए रवाना हुआ।
गरीबी में जीवन और मौत के बीच झूलते एक मासूम की जिंदगी खतरे में थी। उसकी पुलिस अफसर बनने की ख्वाहिश तो एक संस्था ने पूरी करवा दी थी।
राजस्थान की संस्था मेक ए विश ने गत एक मई को सिरसा के नोहरिया बाजार की गली कांडा वाली निवासी जगदीश शर्मा के 10 वर्षीय पुत्र गिरीश को एक दिन का पुलिस कमिश्नर बनवाया था।
गिरीश की दोनों किडनियां फेल हो चुकी थी। मां-बाप किडनी देने को तैयार थे पर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भी पैसा नहीं था। इस मामले में अमर उजाला ने खबर प्रकाशित की जिसके बाद मदद के लिए लोगों के हाथ बढ़े।
समाचार पत्र से गिरीश के बारे में पता चलने पर पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने जगदीश को गुड़गांव बुलाया और ऑपरेशन का सारा खर्च वहन करने का भरोसा दिया।
जगदीश ने बताया कि गिरीश को मेदांता में दाखिल करवाया जहां पर 20 अक्तूबर को गिरीश की मां बबली ने किडनी दी। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा।
मां बेटा दोनों स्वस्थ है। उधर गिरीश का कहना है कि वह पढ़ लिखकर पुलिस अफसर बनेगा। गोबिंद कांडा ने कहा कि गिरीश की आगे चलने वाली दवाओं का खर्च भी वहन किया जाएगा।