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Sirsa News: शहरों की तर्ज पर अब गांवों में होगा कचरे का निस्तारण

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गांवों में कुछ इस प्रकार से बनेंगे एमआरएफ सेंटर।
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सिरसा। गांवों में नजर आने वाले कूड़े के ढेर अब दिखाई नहीं देंगे। शहरों की तर्ज पर गांवों में कचरे का निस्तारण को लेकर प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। गांवों में विशेष रूप से एमआरएफ सेंटर यानी मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटीज सेंटर बनाए जाएंगे। इन्हें बनाने को लेकर प्रत्येक गांव में पांच लाख रुपये की लागत आएगी। ऐसे में जिले के 204 गांवों के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया है और टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की माने तो 50 गांवों में पूर्व में बनाए गए एमआरएफ सेंटर बेहतर तरीके से काम कर रहे हैं और पंचायतें इन्हें अपने स्तर पर चला रही हैं। इन गांवों में अब कूड़े के निपटान की समस्या नहीं रही है। इनके बनने से गांव स्वच्छ व सुंदर बने हैं।
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यह होगा गांवों को फायदा
गांवों में एमआरएफ सेंटर बनाने के साथ ही गांवों में डोर टू डोर कचरा इकट्ठा किया जाएगा। शहरों की तर्ज पर सुबह के समय हथरेहड़ी से कर्मचारी कचरा इकट्ठा करेंगे। इससे फायदा यह होगा कि गलियों और चौक-चौराहों में प्लास्टिक व अन्य कचरा नजर नहीं आएगा। डोर टू डोर कचरा उठाने के बाद उसका निपटान आसानी से किया जा सकता है। ऐसे में ग्रामीणों की कचरा जगह-जगह पर डालने की समस्या का समाधान होगा और गांव में गंदगी नहीं होगी।
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इस प्रकार करेंगे एमआरएफ सेंटर काम
एमआरएफ सेंटर यानी मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटीज सेंटर में घरों से लाए गए कचरे को अलग-अलग किया जाता है। कचरे में मुख्य रूप से घरों से निकलने वाले किचन को अलग कर खाद बनाई जाती है। वहीं प्लास्टिक वेस्ट, कांच, लोहे और अन्य धातुओं को अलग किया जाएगा। इन सबके लिए अलग से चेंबर बनाए जाएंगे। जहां पर इनको इकट्ठा किया जाएगा, ताकि इन्हें बेचा जा सके। वहीं खाद का गांव के स्कूलों व अन्य पार्क आदि में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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पंचायतें संभालेगी कमान

जिला पंचायती राज विभाग की ओर गांवों में एमआरएफ बनाए जाएंगे। चेंबर, शेड और कमरे का निर्माण विभाग की ओर से किया जाएगा। इसे बनाने के बाद पंचायत को हैंडओवर कर दिया जाएगा और पंचायत ही चलाएंगी। एमआरएफ वेस्ट को बेचकर सफाई कर्मचारियों की सैलरी व अन्य खर्च निकाले जाएंगे। एमआरएफ सेंटर सही तरह से चले इसका पूरा जिम्मा पंचायत का होगा और पंचायत के साथ ही मिलकर जिला प्रशासन लोगों को कचरा निस्तारण को लेकर जागरूक करेगा।

जिले के 204 गांवों को कचरे की समस्या का स्थायी समाधान करने को लेकर एमआरएफ सेंटर बनाए जाएंगे। इसको लेकर 10 करोड़ का बजट पास हुआ है और टेंडर प्रक्रिया जारी है। एमआरएफ सेंटर बनाने के बाद पंचायतों को सौंप दिए जाएंगे। इनको बनाने का उद्देश्य गांवों को स्वच्छ व सुंदर बनाना है। पहले भी 50 गांवों में सफलता पूर्वक एमआरएफ सेंटर चल रहे हैं।
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-गौरव भारद्वाज, एक्सईएन, पंचायती राज विभाग
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